इसरो के चेयरमैन डॉ. वी नारायणन बोले- सपने बड़े देखें और पूरा करने के लिए लक्ष्य तय करें
एमएमएमयूटी के दीक्षांत समाराेह में मुख्य अतिथि इसरो के चेयरमैन ने विद्यार्थियों को दी जीवन की सीख
गोरखपुर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉ. वी नारायणन ने कहा कि आज तकनीक तेजी से बदल रही है और अवसरों के साथ चुनौतियां भी सामने हैं। आपके सामने जानकारी और संसाधनों की असीमित पहुंच है, जो आपको नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। लेकिन साथ ही समाज की समस्याओं का समाधान करना भी आपकी जिम्मेदारी है। कहा कि सपने बड़े देखें और उसे पूरा करने के लिए लक्ष्य तय करें। कोशिश करें कि समाज व राष्ट्र के लिए कुछ कर सकें।
इसरो के चेयरमैन डॉ. वी नारायणन मंगलवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इसरो की हालिया उपलब्धियों का वर्णन किया। कहा कि अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का एक्सिओम मिशन, जीएसएलवी एफ16/निसार प्रक्षेपण, स्पाडेक्स डॉकिंग, आदित्य-एल-1 डेटा जारी, और प्रोपल्शन तथा स्वदेशी तकनीक में सफलताएं मिली है। उन्होंने 1962 से भारत की अंतरिक्ष यात्रा का पता लगाने का श्रेय विक्रम साराभाई जैसे अग्रदूतों को दिया और चंद्र, मंगल मिशनों तथा उपग्रह प्रक्षेपणों में विश्व रिकॉर्ड का उल्लेख किया, जो गगनयान की ओर ले जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कृषि, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, शिक्षा व साक्षरता के साथ ही भारत, दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का जिक्र किया।
उन्हाेंने कहा कि दीक्षांत समारोह उत्सव, आत्मचिंतन और भविष्य की प्रेरणा का प्रतीक है। आप सब अपने जीवन के नए चरण में ज्ञान, परिपक्वता और एक महान संस्थान की डिग्री के साथ प्रवेश कर रहे हैं। इस अवसर पर मैं स्वामी विवेकानंद के संदेश को दोहराना चाहता हूं कि उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।
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विद्यार्थियों को दिए मंत्र
- कठोर और स्मार्ट परिश्रम करें।
- असफलता को प्रतिक्रिया मानकर अपनाएं।
- चरित्र की आंतरिक शक्ति विकसित करें।
- बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखें।
- कल्पनाशील, नवाचारी और सृजनशील बनें।
- आत्मविश्वास और आत्मप्रेरणा को अपनाएं।
- टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता को विकसित करें।
- सबसे पहले एक अच्छे इंसान बनें।