गोरखपुर। आदी नदी में जा रहे फैक्टरियों के पानी को शोधित करने के लिए अड़िलापार में चार एमएलडी का सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के लिए आठ जनवरी को कंसल्टिंग एजेंसी तय होगी। एजेंसी प्लांट लगाने के लिए डीपीआर तैयार करेगी। इस बार सीईटीपी का निर्माण गीडा ही कराएगी।
सिद्धार्थनगर जिले से निकली आमी संतकबीरनगर के खलीलाबाद औद्योगिक एरिया के अलावा मगहर होते हुए गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र (गीडा) के बगल से गुजरते हुए राप्ती नदी में मिल जाती है। नदी का पानी खलीलाबाद से गीडा पहुंचते-पहुंचते काला हो जाता है। कई बार मछलियां भी मर चुकी हैं। इस नदी में फैक्टरियों का दूषित पानी गिरने से रोकने के लिए एनजीटी के सुझाव पर पहले 35 एमएलडी क्षमता का सीईटीपी लगाने का सुझाव था, जिसे बाद में खर्च अधिक होने की वजह से घटाकर 15 एमएलडी का कर दिया गया। इसके बाद उद्यमियों की शिकायत पर दोबारा सर्वे कराया गया।
इसके बाद साढ़े सात एमएलडी का सीईटीपी प्रस्तावित किया गया। जलनिगम को इसका निर्माण कराना था, जिसके लिए अड़िलापार में जमीन भी अधिग्रहित हो गई। लेकिन पिछले साल जल निगम ने इसका निर्माण कराने से मना कर दिया था। इसके बाद कमिश्नर ने गीडा प्रशासन को इसका निर्माण कराने की जिम्मेदारी दे रखी है। अब गीडा प्रशासन ने इसके लिए कंसल्टिंग एजेंसी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। बृहस्पतिवार को इसे लेकर एक बैठक भी हुई। इसमें बताया गया कि आठ जनवरी को एजेंसी तय हो जाएगी। यही एजेंसी डीपीआर बनाएगी। इसके बाद निर्माण आरंभ कराया जाएगा।
गीडा सीईओ अनुज मलिक ने बताया कि एजेंसी के लिए आवेदन मांगे गए हैं। आठ जनवरी को टेंडर के जरिये एजेंसी का चयन होगा। गीडा प्रशासन का प्रयास है कि एजेंसी तय कर जल्द डीपीआर बनवाने का कार्य आरंभ कर दिया जाए।