रामगढ़ताल स्थित दिग्विजय नाथ पार्क में शाम 7:30 से 8:30 बजे तक चलेगा मॉकड्रिल
डीएम ने जनता से की अपील, ब्लैक आउट के समय बंद रखें घर की लाइटें
गोरखपुर। सुरक्षा व्यवस्था परखने और आपात काल से निपटने के लिए ब्लैक आउट और रेड मॉकड्रिल का आयोजन रामगढ़ताल के नौकायन रोड स्थित दिग्विजय नाथ पार्क में बुधवार को किया जाएगा। एक घंटे का यह मॉकड्रिल शाम 7:30 से रात 8:30 बजे तक चलेगा। डीएम कृष्णा करुणेश ने जनता से अपील की है कि ब्लैकआउट के दौरान अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। यह अभ्यास नागरिकों को संभावित आपातकालीन परिस्थितियों जैसे कि हवाई हमले या बड़े आपदाओं की स्थिति में सतर्क रहने और त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
डीएम ने जनता से अपील करते हुए कहा है कि निर्धारित समय शाम 07:30 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक ब्लैकआउट के समय बिजली बुझाना, एअर रेड सायरन बजने पर शांतिपूर्वक अपने सुरक्षित स्थान पर शरण लें, अफवाहों से बचें और प्रशासन के दिए गए निर्देशों का पालन करें। इस दौरान नागरिक सुरक्षा स्वंयसेवकों व स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें। मॉकड्रिल को गंभीरता से लें ताकि आपातकाल की स्थिति में जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके। बच्चों और पूरे परिवार को जागरूक करें, मोबाईल या रेडियो पर सरकारी अलर्ट सुनें ।
उन्होंने बताया कि इस दौरान सुरक्षित शरण स्थल और बंकर की जानकारी लें। अपने घर में मजबूत बिना खिड़की वाला कमरा तैयार रखें। शरण स्थल तक जल्दी से पहुंचने का रास्ता पहले से तय करें। घर में तीन दिन के पीने के पानी, सूखा भोजन (बिस्किट ड्राई फूड आदि), प्राथमिक चिकित्सा कीट, टार्च और एक्सट्रा सेल रखें। जरूरी दस्तावेज जैसे आईडी, मेडिकल रिपोर्ट आदि सुरक्षित रखें, खिड़कियों पर मोटे पर्दे काले कागज लगाएं, शीशे से दूर रहें, जमीन पर लेट जाएं, हवाई हमले के बाद बाहर तभी निकलें, जब सरकारी निर्देश मिलें, घायल हों तो प्राथमिक उपचार करें, संदिग्ध वस्तु या बम दिखे तो छूए नहीं पुलिस को सूचित करें। यदि रोड पर हों तो वाहन किनारे खड़ी कर वाहन की लाईट बंद कर दें, समय-समय पर जिला प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।
...........
घरों की लाइट बंद रखें
डीएम ने अपील करते हुए कहा है कि मॉकड्रिल के समय अपने घरों व प्रतिष्ठानों आदि की लाइट बंद रखें, जिससे प्रकाश बाहर दिखाई न दे। हवाई हमले का रेड सिग्नल दो मिनट तक ऊंची-नीची आवाज में सायरन बजाया जाता है। खतरा टलने की सूचना तक सायरन को एक ही आवाज में बजाकर दी जाती है, ताकि बचाव एवं राहत की कार्यवाही तत्काल की जा सके।