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यूरिया की कालाबाजारी: अधिक खरीद करने वाले 20 किसानों की शुरू हुई जांच

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पिछले साल की तुलना में अब तक एक हजार मीट्रिक टन अधिक बंट गई यूरिया, फिर भी बनी हुई है किल्लत
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गोरखपुर। पिछले साल की तुलना में एक हजार मिट्रिक टन यूरिया का अधिक वितरण होने के बाद भी जनपद में यूरिया की किल्लत बनी हुई है। इसे देखते हुए डीएम ने जिले भर में चिह्नित 20 ऐसे किसानों की जांच का निर्देश दिया है, जिन्होंने जरूरत से अधिक यूरिया की खरीद की है।
जिले में अचानक यूरिया की किल्लत हो गई है। कृषि विभाग का दावा है कि खरीफ के पूरे सीजन में पिछले साल 42 हजार मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हुई थी, जबकि इस साल अभी तक 43 हजार एमटी यूरिया बिक चुकी है। अभी खरीफ सीजन करीब डेढ़ महीने बाकी है। यूरिया की किल्लत के पीछे नेपाल में हो रही तस्करी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इसके बाद गोरखपुर में भी जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है।
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कालाबाजारी रोकने के लिए डीएम के निर्देश पर जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने 20 खरीदारों के यूरिया खरीद की जांच के आदेश दे दिए हैं। इन काश्तकारों ने अधिक मात्रा में यूरिया की खरीद की है। यूरिया खरीद की जांच संबंधित किसान के ब्लाॅक के एडीओ कृषि कर रहे हैं।

बटाईदार को देना होगा अनुबंध पत्र
यूरिया की खरीद में सबसे अधिक खेल बटाईदार को लेकर होता है। जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि कोई बटाईदार किसी का खेत बटाई पर लिया है तो उसे उस किसान के साथ एग्रीमेंट कराना होगा। अन्यथा उसके द्वारा बाजार से ली गई यूरिया की गणना नहीं की जाएगी। माना जाएगा कि उसने यूरिया को किसी और को निजी लाभ के लिए दिया है।
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बाढ़ नहीं आने से भी बढ़ी खपत
एआर कोऑपरेटिव नीरज कुमार का कहना है कि साधन सहकारी समितियों से पिछले साल की तुलना में इस साल डेढ़ गुना अधिक यूरिया बिकी है। समितियों पर लगातार यूरिया जा रही है। कैंपियरगंज ब्लॉक को छोड़कर अन्य कहीं किल्लत नहीं है। इस साल बाढ़ का असर कम होने के कारण धान का क्षेत्रफल भी बढ़ा है। इससे करीब 20 प्रतिशत यूरिया की खपत बढ़ी है।
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