इस पूरे खेल में अस्पताल का मैनेजर ताहिर खान भी बराबर का भागीदार निकला। जांच में पुलिस को पता चला कि ताहिर, डिसेंट हॉस्पिटल के संचालक शमशुल कमर का छोटा भाई है। वह इंश्योरेंस एजेंटों के सीधे संपर्क में रहता था और क्लेम पास कराने की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करता था। अस्पताल के कागजात तैयार कराने से लेकर फर्जी मरीजों को दाखिल दिखाने तक का जिम्मा उसी के पास था।
रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल में 1.20 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस ठगी के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को आयुष डॉक्टर अफजल अंसारी और अस्पताल के मैनेजर ताहिर खान को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया।
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ताहिर खान अस्पताल संचालक गेंहुआसागर निवासी शमशुल कमर का छोटा भाई है। वहीं गिरफ्तार डॉक्टर खुद को सर्जन बताते हुए बीमा क्लेम की फाइलों पर हस्ताक्षर करता था जबकि उसके पास आयुष की डिग्री है।
इससे पहले बुधवार को पुलिस ने डिसेंट अस्पताल के संचालकों गेंहुआसागर निवासी शमशुल कमर और कोतवाली के मेवातीपुर निवासी प्रवीण त्रिपाठी को जेल भिजवा दिया था।
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मामले की विवेचना कर रहे एसओ रामगढ़ताल थाना नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी डॉ. अफजल अंसारी गगहा के नर्रे बुजुर्ग का रहने वाला है। उसके पास केवल आयुष की डिग्री थी लेकिन वह खुद को एमबीबीएस सर्जन बताता था।
उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि अस्पताल में भर्ती दिखाए गए फर्जी मरीजों की फाइलों पर वहीं हस्ताक्षर करता था। इन हस्ताक्षरों के आधार पर बीमा कंपनियों से क्लेम पास होते थे। पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर अफजल अंसारी लंबे समय से इस फर्जीवाड़े में शामिल था। वह बीमा एजेंटों और अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत कर लाखों रुपये का हेरफेर कर रहा था।
यह है मामला
नौ सितंबर 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने गोरखपुर पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि डिसेंट हॉस्पिटल और एपेक्स हॉस्पिटल में फर्जी मरीज भर्ती कराकर क्लेम की रकम निकाली जा रही है। जांच में सामने आया कि बीमाधारकों के फर्जी दस्तावेज बनाए गए।
फिर उनके बैंक खाते खुलवाकर क्लेम के एक करोड़ 80 लाख 672 रुपये निकाल लिए गए। बीमा कंपनी के अधिकारियों की जांच में पता चला कि जिस एपेक्स हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती दिखाया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं डिसेंट हॉस्पिटल के रिकाॅर्ड में भी कई संदिग्ध फाइलें मिलीं।
फर्जीवाड़े में बराबर का भागीदार निकला मैनेजर
इस पूरे खेल में अस्पताल का मैनेजर ताहिर खान भी बराबर का भागीदार निकला। जांच में पुलिस को पता चला कि ताहिर, डिसेंट हॉस्पिटल के संचालक शमशुल कमर का छोटा भाई है। वह इंश्योरेंस एजेंटों के सीधे संपर्क में रहता था और क्लेम पास कराने की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करता था। अस्पताल के कागजात तैयार कराने से लेकर फर्जी मरीजों को दाखिल दिखाने तक का जिम्मा उसी के पास था।
पुलिस को प्राथमिक जांच में अभी तक 1.80 करोड़ रुपये की ठगी की बात सामने आई है। यह रकम अलग-अलग बीमा कंपनियों से फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम कराकर ली गई। यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है, क्योंकि अब तक केवल शुरुआती फाइलें ही खंगाली गई हैं।
इस फर्जीवाड़े में और भी लोगों के शामिल होने की आशंका है। जल्द ही अस्पतालों के रिकॉर्ड की गहन जांच कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। बीमा कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्ध अस्पतालों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं; अभिनव त्यागी, एसपी सिटी