डीडीयू कैंपस में अभिभावक की मौत पर बरसे एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गणित विभाग के छात्र के बैक पेपर लगने और फरियाद लेकर पहुंचे उसके पिता की हार्ट अटैक से मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने डीडीयू प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि पीड़ित छात्र आयुष मिश्र के एमएससी मैथ के प्रथम सेमेस्टर में 7.83 सीजीपीए, द्वितीय सेमेस्टर में आठ सीजीपीए और तृतीय सेमेस्टर में 8.50 सीजीपीए थे। चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम नौ जुलाई को जारी हुए थे। चतुर्थ सेमेस्टर में सात सीजीपीए अर्जित करने के बाद भी अनुत्तीर्ण किए जाने से वह परेशान था।
उन्होंने कहा कि आयुष को क्लासिकल मैकेनिक्स के पेपर में 75 में से 34 और आंतरिक में 25 में सिर्फ एक अंक मिले हैं। वह परिणाम आने के बाद डेढ़ महीने से विश्वविद्यालय के चक्कर लगा रहा था। उसने कुलपति और परीक्षा नियंत्रक से भी गुहार लगाई लेकिन न्याय नहीं मिला।
एमएलसी ने बताया कि उन्होंने भी डीडीयू प्रशासन को पत्र लिखकर न्यायपूर्ण समाधान का आग्रह किया था जिसे नजरअंदाज किया गया। आरोप लगाया कि एक सितंबर को अपने पिता मुरलीधर मिश्र के साथ छात्र विश्वविद्यालय में गया था लेकिन गणित के विभागाध्यक्ष की तरफ से किए गए दुर्व्यवहार से उसके पिता को हार्ट अटैक आ गया और उनका निधन हो गया। इस मामले में उन्होंने संबंधित परीक्षक और विभागाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस मामले में मुआवजा दिए जाने की भी मांग की है।
हल्की राजनीति कर रहे एमएलसी, मुझे कुछ हुआ तो होंगे जिम्मेदार
डीडीयू में छात्र के अभिभावक की मौत का मामला
गोरखपुर। डीडीयू के अधिष्ठाता कला संकाय व गणित के प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह पर व्यक्तिगत खुन्नस में हल्की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक वजहों से उनकी नाराजगी रहती है। इसी नाराजगी में एमएलसी एक ऐसे मामले में राजनीति कर रहे हैं, जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। वह एक व्यक्ति की दुखद मौत का राजनीतिकरण कर रहे हैं। प्रो. राव ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वह हार्ट के पेशेंट हैं और यदि उन्हें कुछ हुआ तो इसके लिए एमएलसी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि एमएलसी के सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। यह पूरा मामला पिछले सत्र का है ओर उन्होंने 24 जुलाई को गणित विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। परीक्षा प्रणाली से उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह मामला इंटरनल नंबर का है। विभागाध्यक्ष इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। अभिभावक के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उन्होंने खारिज किया है। ब्यूरो