देवरिया के सलेमपुर की रहने वाली लीलावती के नवजात बच्चे को 17 जनवरी लाया गया था बीआरडी
वेंटिलेटर खाली नहीं होने से वहां नहीं किया गया भर्ती, एंबुलेंस चालक वेंटिलेटर के नाम पर झांसा देकर ले गया निजी अस्पताल
पीड़िता ने गुलरिहा पुलिस को लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की, पुलिस कर रही जांच
गुलरिहा। 108 नंबर एंबुलेंस के चालक ने बीमार बच्चे को वेंटिलेटर के नाम पर एक निजी अस्पताल को बेच दिया। अस्पताल वालों ने पांच दिन में 60 हजार रुपये इलाज के नाम पर वसूल लिए पर बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की कोशिश की तो अस्पतालकर्मियों ने गलत इंजेक्शन लगाकर मार देने की धमकी दी। इस मामले परिजनों ने गुलरिहा पुलिस को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
देवरिया से बच्चे का इलाज कराने आए तीमारदार ने सरकारी 108 नंबर की एंबुलेंस के चालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। तीमारदार का आरोप है कि चालक वेंटिलेटर के नाम पर निजी अस्पताल पहुंचाया, वहां पर पांच-पांच सौ रुपये लेकर वापस चला गया। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने भी 60 हजार रुपये वसूले और बच्चे की तबियत में भी सुधार नहीं हुआ। गुलरिहा पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है।
देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र के वार्ड नंबर 11 भरौली की लक्ष्मी देवी ने बताया कि 17 जनवरी की रात एक बजे देवरानी लीलावती देवी के नवजात बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल लेकर गए, वहां से गोरखपुर रेफर कर दिया गया। गंभीर हालत में बच्चे को 108 नम्बर एम्बुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आए। यहां बाल रोग सेवा संस्थान के कर्मचारियों ने बताया कि वेंटिलेटर खाली नहीं है। दो दिन इंतजार करना पड़ेगा।
इस पर 108 नंबर एंबुलेंस चालक और उसके सहयोगी ने बताया कि दो दिन में तो बच्चा मर जाएगा। बगल में एक अस्पताल है, वहां बच्चे को भर्ती करवा दो। बच्चे की हालत देखते हुए वे उसके झांसे में आ गए। वह उन्हें मेडिकल कॉलेज के बगल में ही एक सुनसान जगह पर स्थित एक अस्पताल में ले गया। वहां बच्चे का भर्ती कराया गया। तभी मैंने देखा कि चालक को पांच-पांच सौ के नोट गिनकर दिए जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कुछ नहीं कहा। तब से बच्चे का इलाज वहां चल रहा है और 60 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ।
परिवार बोला-खतरे में नवजात
लक्ष्मी देवी ने बताया कि बच्चे के सीने में जकड़न थी। जब कोई फायदा नहीं हुआ तो उसे फिर मेडिकल कॉलेज ले जाने लगे। आरोप है कि तब अस्पताल का स्टाफ धमकी देने लगा कि और रुपये लाओ नहीं तो बच्चे को गलत इंजेक्शन लगाकर मार देंगे। उनकी धमकी से वे सहम गए। अब भी बच्चा उसी अस्पताल में भर्ती है। लक्ष्मी ने कहा कि वहां बच्चे की जान को खतरा है।
पहले भी लग चुके हैं एंबुलेंस चालकों पर आरोप
दिसंबर 2024 में सिद्धार्थनगर के मायापति दुबे ने एक निजी एंबुलेंस चालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कैंट थाने में तहरीर दी थी। आरोप था कि प्रसव पीड़ा होने पर पत्नी को सिद्धार्थनगर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बाहर निकले तो एक प्राइेवट एंबुलेंस चालक ने उन्हें झांसा देकर गोरखपुर के खोआ मंडी के एक अस्पताल में पत्नी को भर्ती करा दिया, इसके बदले उसे रुपये भी मिले। वहां पर डॉक्टर की लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत हो गई।
कोट-
महिला की शिकायत की जांच कराई गई। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की हालत ठीक है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। घरवाले चाहें तो उन्हें सरकारी एंबुलेंस भी उपलब्ध करा दी जाएगी। अगर एंबुलेंस चालक ने वहां तक पहुंचाया होगा तो जांच कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
-डॉ. आशुतोष दूबे, सीएमओ, गोरखपुर
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शिकायत मिली है। उसकी जांच पड़ताल चल रही है। शिकायत पत्र सीएमओ को भेजा गया है। साक्ष्य के आधार आगे कार्रवाई की जाएगी।
रवि सिंह, सीओ, गोरखनाथ