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एम्स: अब 10 रुपये में मिलेगी रैन बसेरे की सुविधा... लगेंगे साइन बोर्ड

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तीमारदारों को रैन बसेरे में रहने के लिए देना होगा मात्र 10 रुपये
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एक महीने में 75 रुपये से घटाकर 10 रुपये किया गया शुल्क
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रैन बसेरे (नाइट शेल्टर) के शुल्क को घटाकर मात्र 10 रुपये प्रति रात कर दिया गया है। कम शुल्क पर आरामदायक जगह मिलने से तीमारदारों को राहत मिलेगी। तीमारदारों को जागरूक करने के लिए ओपीडी, इमरजेंसी, ओटी सहित अन्य स्थानों पर साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे।

एम्स में पूर्वांचल के साथ ही बिहार और नेपाल से प्रतिदिन चार से पांच हजार मरीज आते हैं। मरीजों के साथ कम से कम तीन से चार लोग आते हैं जो इलाज के दौरान परिसर में ही समय बिताते हैं। रैन बसेरे की जानकारी नहीं होने या शुल्क ज्यादा होने के कारण कई तीमारदार ओपीडी, इमरजेंसी, ओटी या वार्ड के बाहर ही बसेरा डाल देते हैं। कई लोग सीढ़ियों, लॉन या गलियारों में रात बिताते हैं तो कुछ पेड़ों के नीचे आराम करते हैं। यह असुविधाजनक तो है ही उनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। अब एम्स प्रशासन ने मरीजों के साथ आए तीमारदारों को सिर्फ 10 रुपये में स्वच्छ रैन बसेरे की सुविधा देने का फैसला किया है। इसकी जानकारी देने के लिए जगह- जगह साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
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वर्जन
हमारी कोशिश है कि मरीजों के साथ आए हर परिजनों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और सस्ती जगह मिल सके। यह केवल एक सुविधा नहीं बल्कि उपचार प्रक्रिया का ही हिस्सा है। नाइट शेल्टर का शुल्क 10 रुपये प्रति रात कर दिया गया है। इसके बारे में जानकारी देने के लिए साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।
डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक


65 रुपये कम हुआ शुल्क

यह पहल जुलाई में शुरू की गई थी। तब नाइट शेल्टर का शुल्क 75 से घटाकर 30 रुपये किया गया था। अब इसे और घटाकर 10 रुपये कर दिया गया है। एक ही महीने में 65 रुपये शुल्क कम किया गया है।
145 बिस्तरों की सुविधा, 100 बुकिंग प्रतिदिन
एम्स के नाइट शेल्टर में कुल 145 बेड की व्यवस्था है। 1 अगस्त की रात 12 बजे से जब शुल्क घटाकर 10 रुपये किया गया तो पहले ही दिन 22 बेड बुक हुए। सामान्यतः प्रतिदिन लगभग 100 बुकिंग होती हैं। यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ने की उम्मीद है।



फोटो
- जीजा के फेफड़ों की बीमारी के इलाज के लिए आया हूं। हम पिछले 5 दिन से अस्पताल में हैं। हमें पता नहीं था कि 10 रुपये में रुकने की सुविधा है, अब जानकारी मिली है तो हम नाइट शेल्टर में ही रहेंगे।
प्रमोद यादव, बिहार

- बेटा बीमार है। बार-बार ऊपर-नीचे जाना पड़ता है इसलिए कुर्सी पर ही सो जाता हूं। अगर जानकारी होती तो शेल्टर में जाता। सस्ते में आराम करने की सुविधा है।
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-सुरेंद्र शर्मा, बेतालपुर
- रिश्तेदार को दिखाने आए हैं। गर्मी और धूप में बाहर रहने में दिक्कत हाेती है। जानकारी होती तो कि सिर्फ 10 रुपये में बेड मिल रहा है तो वहीं पर रुकते।
वकील गुप्ता, सिवान
- पत्नी बीमार हैं, 4 दिन से यहीं रह रहा हूं। कभी वार्ड के बाहर तो कभी ओपीडी की तरफ सोकर रात गुजारता था। अब जानकारी मिली है तो रैन बसेरे में ही रुकूंगा।
राम दरस गुप्ता, सुकरौवली
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