अधिकांश दवाएं जन औषधि केंद्रों की बताई जा रही हैं
गोरखपुर। मोहद्दीपुर स्थित हाइडिल कॉलोनी में मंगलवार को प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र की एक्सपायर हो चुकीं करीब 10 बोरी दवाएं कूड़े के ढेर पर मिलीं। कबाड़ बीनने वाले इन दवाइयों को एकत्रित कर रहे थे। यह देख किसी ने अफसरों को सूचना दी तो औषधि निरीक्षक राहुल कुमार मौके पर पहुंचे और दवाओं को जब्त कर नष्ट कराने की बात कही। ये दवाएं किस दुकान की हैं, इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
औषधि नियमों के अनुसार, एक्सपायर्ड दवाओं का उचित निस्तारण आवश्यक होता है, लेकिन शहर में दवा निस्तारण की कोई व्यवस्था ही नहीं है। भालोटिया मार्केट में तो सामने खुले मैदान में ही दवाएं फेकी जाती हैं। वहीं, ग्रामीण इलाके में इन्हें नष्ट करने के बजाय दुकानदार बेच भी देते हैं। लोगों ने बताया कि जिस स्थान पर दवाएं फेंकी गई थीं, वहां नगर निगम के सफाईकर्मी अक्सर कूड़ा इकट्ठा करते हैं। हालांकि, यह कोई आधिकारिक डंपिंग साइट नहीं है, फिर भी यहां रोजाना कचरा गिराया जाता है और कई दिनों तक नहीं उठाया जाता। इससे राहगीरों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मंगलवार दोपहर में कुछ कूड़ा बीनने वाले यहां से खुले में फेंकी दवाएं बीनकर ले जा रहे थे। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को दी गई तो कुछ देर बाद ड्रग इंस्पेक्टर वहां पहुंचे। बताया जा रहा है कि 10 बोरियों में भरी दवाएं मिलीं। डीआई राहुल कुमार ने कहा, एक्सपायर्ड दवाओं को इस तरह फेंकना गलत है। जब्त की गई दवाओं के बैच नंबर के आधार पर संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं की जांच की जा रही है।