जानकारी के मुताबिक, खानदानी बंटवारे के बाद जाफरा बाजार से मधुर मुरली के पिता सूर्य विहार आ गए थे। तब उन्होंने सीमेंट का कारोबारी शुरू किया, जो खूब चला भी, लेकिन बाद में मधुर मुरली हार्डवेयर की दुकान कर लिए और उनके भाई विजय अलग दुकान कर लिए हैं। मधुर की दुकान नहीं चली जिससे वह आर्थिक रूप से कमजोर होते चले गए।
दो बेटों में बड़े बेटे प्रिंस को भी उन्होंने दुकान करा दिया। बैंक से उसने कर्ज भी ले लिया, लेकिन दुकान नहीं चली। इस दौरान उसने बाइक भी कर्ज पर ले ली थी। कर्ज नहीं भर पाया तो बाइक को बैंक वाले खींच ले गए। प्रिंस ने ऑनलाइन फूड डिलेवरी का काम शुरू कर दिया। 2016 में उसकी शादी हुई और फिर एक बेटा हुआ।
कर्ज का दबाव बढ़ने पर उसने पत्नी के सारे जेवर भी गिरवी रख दिए। अंत में होली से पहले पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई। इसके बाद बाइक वापस पाने के लिए उसने पिता से 40 हजार रुपये की मांग शुरू कर दी। पिता के पास रुपये नहीं थे, वह असमर्थता जताए जिसका परिणाम शनिवार को उनकी हत्या के रूप में सामने आया।
मधुर मुरली काफी सम्मानित और अच्छे आदमी थे। घर की वर्तमान आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से आसपास के लोगों और किराएदारों ने आर्थिक सहयोग किया है। आगे भी परिवार के साथ हम लोग खड़े हैं।
- अरविंद चौरसिया, पूर्व पार्षद