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मोती पोखरा: नगर निगम गोरखपुर की पहल- अब दिखने लगी गंदगी से भरे पोखरे की तली, पानी हुआ 'पारदर्शी'

Wed, 23 Oct 2024 12:07 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

मोती पोखरा को स्वच्छ बनाने की प्रक्रिया पूरे 90 दिन चलने वाली है। वेलिएंट इंटैक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ परम देसाई ने बताया कि पोखरे में नैनो बबल्स की शक्ति, उत्प्रेरक के रूप में अल्ट्रासाउंड और फ्री रेडिकल्स का उपयोग किया जा रहा। अल्ट्रासाउंड मशीन से 20 हजार से 30 हजार मेगा हर्त्ज की ध्वनियां पोखरे के जल में उत्पन्न कर ई-कोलाई बैक्टीरिया के सेल को क्षतिग्रस्त कर रहे।
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24 सितंबर के पहले गंदा पानी( पहली फोटो), गंदगी साफ होने के बाद पोखरे का साफ पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
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वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़े मोती पोखरे का पानी साफ होने लगा है। साउथ अफ्रीका में तालाब और पोखरों के जल को शोधित कर स्वच्छ बना रही गुजरात की कंपनी वेलिएंट इंटैक प्राइवेट लिमिटेड खुद के खर्चे पर मोती पोखरा के पानी को 24 सितंबर से साफ करने में जुटी है।
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करीब एक माह बीत जाने के बाद उसका पानी काफी हद तक साफ हो गया है। फर्म ने अपनी पेटेंट तकनीक,‘आरईजीएएल’ यानी रेडिकल एन्हांसमेंट यूसिंग गैस असिस्टेड लिक्विड डिस्पर्सन’ का इस्तेमाल कर पोखरे को इतना साफ कर दिया है कि उसके तल में डूबी नाव भी दिखने लगी है।
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मोती पोखरा ताल ऐसे गंदगी से भरा था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
यही नहीं, तालाब में बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) 65 से घटकर 09 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) और सीओडी (रासायनिक ऑक्सीजन मांग) 170 से घट कर 10.1 पीपीएम और अमोनिया की मात्रा भी खतरनाक स्तर 1.8 से घटकर 0.01 पीपीएम रह गई है।

मोती पोखरा को स्वच्छ बनाने की प्रक्रिया पूरे 90 दिन चलने वाली है। वेलिएंट इंटैक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ परम देसाई ने बताया कि पोखरे में नैनो बबल्स की शक्ति, उत्प्रेरक के रूप में अल्ट्रासाउंड और फ्री रेडिकल्स का उपयोग किया जा रहा। अल्ट्रासाउंड मशीन से 20 हजार से 30 हजार मेगा हर्त्ज की ध्वनियां पोखरे के जल में उत्पन्न कर ई-कोलाई बैक्टीरिया के सेल को क्षतिग्रस्त कर रहे।
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सफाई होने के बाद मोती पोखरे का पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
निरंतर चलने वाली इस प्रक्रिया से ई-कोलाई मृत हो जाते हैं। दूसरी ओर नैनो बबल तकनीक का ‘एरेटर’ की मदद से इस्तेमाल जारी है। एरेटर, कोरोना वायरस से भी छोटे-छोटे बुलबुलों की मदद से ऑक्सीजन पानी के तल तक पहुंचाता है। इससे जल में आक्सीजन की मात्रा में बढ़ोतरी के साथ लाभकारी बैक्टीरिया को पनपने और खुद को तेजी से विस्तारित करने में सफलता मिलती है।

पोखरे के किनारे बनेगा पाथवे
नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि इस विधि के इस्तेमाल से झील और पोखरा की सफाई के लिए ड्रेजिंग की आवश्यकता नहीं होती है। जल में ऑक्सीजन की मात्रा बनने के साथ ही मछलियों, जलीय जीव और वनस्पतियों की वृद्धि के लिए उचित वातावरण मिलता है। पोखरे का पानी पूरी तरह साफ होने के बाद किनारे पर पाथवे और बैठने के लिए बेंच लगाए जाएंगे।
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