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गोरखपुर में भाजपा विधायकों की गुहार, पीडब्लूडी की जगह आरईएस से कराएं सड़कों का निर्माण

Thu, 03 Dec 2020 02:47 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर जिले के पांच भाजपा विधायकों ने ग्राम्य विकास मंत्री मोती सिंह को पत्र लिखकर कार्यदायी संस्था बदलने की गुहार लगाई है। विधायकों के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग की जगह ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) को नामित किया जाए। लोक निर्माण विभाग के पास काम का ज्यादा दबाव है। विधायकों के पत्र पर विभागीय मंत्री व प्रमुख सचिव ने सकारात्मक रुख अपनाया है। जल्द ही मामला मुख्यमंत्री के सामने जा सकता है।
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विधायक का पत्र विभागी मंत्री मोती सिंह को भी मिला चुका है। इसी पत्र का हवाला देते हुए ग्राम्य विकास मंत्री ने अपर मुख्य सचिव से जानकारी मांगी है। साथ ही कहा है कि विधायकों का प्रस्ताव उचित लग रहा है। यही पत्र आरईएस गोरखपुर भी आया है। इसके मुताबिक कैंपियरगंज से विधायक फतेहबहादुर सिंह, चौरीचौरा से विधायक संगीता यादव, बांसगांव से विधायक डॉ. विमलेश पासवान, सहजनवां से विधायक शीतल पांडे और गोरखपुर ग्रामीण से विधायक विपिन सिंह ने पत्र लिखा है।

इन विधायकों ने प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 2020-21 के प्रस्तावों को भेजा है। साथ ही अनुरोध किया है कि कार्यदायी संस्था के रूप में आरईएस को नामित किया जाए। विधानसभा क्षेत्रों में जो सड़कें पास हैं, उनके निर्माण में देरी हो रही है। 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे। इससे पहले ही सड़क निर्माण पूरा कराने का दूसरा विकल्प नहीं है। पत्र लिखने की पुष्टि कैंपियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवां व बांसगांव से भाजपा विधायकों ने की है।
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कर्मचारी परिषद ने उठाए सवाल

विधायकों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने बेहतर काम कराए हैं लेकिन काम का दबाव बहुत ज्यादा है। जो सड़कें पास हैं, उनके निर्माण में भी देरी हो रही है। आरईएस यूपी सरकार की अच्छी कार्यदायी संस्था है। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण का लंबा अनुभव है। इस सिलसिले में विधायक विपिन सिंह से मोबाइल फोन पर संपर्क नहीं हो सका। पक्ष आते ही ही प्रकाशित किया जाएगा।   
 
विधायकों की ओर से कार्यदायी संस्था बदलने का पत्र लिखने पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि लोक निर्माण विभाग का एस्टीमेट हर विभाग में मान्य होता है। सड़कों के निर्माण और गुणवत्ता सर्वोपरि है। इसके बावजूद कार्यदायी संस्था बदलने की मांग समझ से परे है। इसके पीछे की मंशा की जांच कराई जानी चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि पीएमजीएसवाई दो डिवीजन हैं। अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता व अवर अभियंता सहित कई कर्मचारियों की तैनाती है। कार्यदायी संस्था बदलेगी तो संबंधित अधिकारी, कर्मचारी क्या करेंगे। कहां जाएंगे। 
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