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Gorakhpur News: माफिया राकेश यादव को पहली बार क्यों हुई सजा, जानिए ये थी वजह- सिस्टम को खूब छकाया था

Sun, 31 Mar 2024 10:50 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

माफिया राकेश यादव पर कुल 45 केस दर्ज हैं। इन केसों में खुद को बचाने में लगभर हर बार राकेश यादव सफल रहा है। पहली बार आर्म्स एक्ट के मामले में उसे पांच वर्ष की सजा हुई है।
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माफिया राकेश यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 25 मार्च 1996। इसी दिन माल्हनपार रोड पर चुनावी जनसभा में मानीराम के तत्कालीन विधायक ओमप्रकाश पासवान की बम मारकर हत्या कर दी गई थी। राकेश यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया। इस दुस्साहसिक वारदात से अपराध जगत में राकेश का दबदबा बढ़ता गया।
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उसके खिलाफ एक के बाद एक 45 केस दर्ज हो गए, लेकिन वह सिस्टम को छकाते हुए बचता रहा। कभी उसने राजनीतिक आकाओं की मदद ली तो कभी सिस्टम के कमजोर पहलुओं की।

ओमप्रकाश पासवान की हत्या के मामले में तो वह बरी हुआ ही, अन्य मामलों में भी वह सिस्टम की लचर चाल से बच गया। किसी मामले में गवाही पूरी नहीं हो सकी, किसी में साक्ष्य नहीं मिला, तो कई मामलों में गवाह ही मुकर गए। अब पहली बार ऐसा हुआ है कि माफिया के पीछे पुलिस साक्ष्यों के साथ पड़ी, जिसकी वजह से उसे पांच साल की सजा हो सकी।
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खबर है कि पुलिस पांच और मामलों में तेजी से साक्ष्य प्रस्तुत कर रही है। इन मामलों में भी जल्द सजा हो सकती है।

माफिया राकेश यादव के घर जब पहुंची थी पुलिस - फोटो : अमर उजाला।
दरअसल, अंडरग्राउंड होकर जमीन का धंधा करने वाला माफिया राकेश यादव बदमाशों की सूची में जिले के टॉप-10 और प्रदेश के टॉप-61 में शामिल है। राकेश यादव की जड़ें जमीन के धंधे में इतनी गहरी हैं कि विवादित भूमि पर कब्जा करने से लेकर उसे बेचने तक में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। 90 के दशक में अपराध में कदम रखने वाले इस माफिया पर 45 केस दर्ज हैं। उसने जेल से छूटने के बाद लंंबे समय तक नेपाल में शरण ली थी।

इस बीच गुपचुप वह अपराध जगत में अपनी जड़ें जमाने में लगा रहा। पुलिस उसकी गतिविधियों से अनजान रही। राकेश के बदले अंदाज का पता पुलिस को 2021 में तब चला, जब उसके शूटर विपिन सिंह ने दिनदहाड़े फिल्मी अंदाज में तीन लोगों पर गोली बरसा दी थी।

पुलिस ने इस मामले में विपिन सिंह को मुठभेड़ में मार गिराया, साथ ही राकेश यादव को मामले का आरोपी बनाया। बाद में वह कोर्ट से रिहा हो गया और जमीन के धंधे से जुड़ गया। जमीन के धंधे में पांव जमाने के बाद उसकी अदावत नए उम्र के बदमाशों से हो गई।

इस बीच राकेश का नाम कई और मामलों में सामने आया, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया जा सका। उसने अपने राजनीतिक संबंधों को जमीन के धंधे और अपराध में खूब भुनाया। प्रदेश में सत्ता बदली तो कई मामलों में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा।

माफिया राकेश यादव के मकान को जीडीए और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने ध्वस्त कर दिया था - फोटो : अमर उजाला।

छोटू संग किया जमीन का धंधा, चला था बुलडोजर
पुलिस के मुताबिक, छोटू प्रजापति भी राकेश यादव के साथ ही मिलकर जमीन का धंधा करता था। बाद में वह राकेश का साथ छोड़कर खुद अपना धंधा चमकाने लगा। यह बात राकेश यादव को खटकने लगी। फिर 2021 में इसी फेर में उसकी छोटू प्रजापति से तकरार हुई।

छोटू पर राकेश के गुर्गे विपिन सिंह ने दो बार हमला किया था। दूसरी बार हमले के दौरान विपिन पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। इसके बाद राकेश यादव का नाम सामने आया।

पुराने मामले में जमानत खारिज कराकर वह 15 जुलाई को कोर्ट में हाजिर हो गया। बाद में 25 जुलाई को उसे देवरिया जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां से रिहा हो गया और फिर पुलिस ने गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर जिला बदर कर दिया। बाद में फिर वह जेल भेजा गया। पुलिस की रिपोर्ट के बाद उसकी अवैध कमाई की संपत्ति पर बुलडोजर भी चलाया गया।

गुलरिहा थाने में जब पकड़ा गया था हिस्ट्रीशीटर राकेश यादव व उसके साथी।
पांच केस चिह्नित, कोर्ट में पैरवी कर सजा दिलाएगी पुलिस
माफिया राकेश यादव पर दर्ज केसों में से पांच मामलों में अब पुलिस कोर्ट में पैरवी करेगी। कोर्ट में गवाही, साक्ष्य प्रस्तुत कराएगी ताकि सजा हो सके। पुलिस के मुताबिक, पीपीगंज थाने में दर्ज गैंगस्टर केस अपराध संख्या 89/91, गुलरिहा थाने में दर्ज 332/99, गुलरिहा में दर्ज आर्म्स एक्ट अपराध संख्या 333/99, पिपराइच में दर्ज अपराध संख्या 77/2020, गुलरिहा थाने में दर्ज अपराध संख्या 870/20 की पैरवी पुलिस करेगी।

1988 में पहली बार हत्या की कोशिश में हुआ था नामजद
माफिया राकेश यादव पर 1988 में चिलुआताल थाने में हत्या की कोशिश का पहला केस दर्ज हुआ था। इसके बाद 1990 में पीपीगंज थाने में हत्या का केस दर्ज हो गया। इन दो मामलों में नाम सामने आने के बाद राकेश पर लगातार केस दर्ज किए गए।

पीपीगंज, गुलरिहा, शाहपुर, चिलुआताल, कोठीभार, महराजगंज, खजनी, कोतवाली, झंगहा, संतकबीरनगर के महुली, बांसगांव, सहजनवां, गोरखनाथ, पिपराइच थाने में कुल 45 केस उस पर दर्ज हैं। इसमें अपहरण, रंगदारी, हत्या, गैंगस्टर, गुंडा सहित अन्य मामले शामिल हैं।

राकेश का भाई और उसकी पत्नी कर रहे थे फर्जी डिग्री पर नौकरी
माफिया राकेश यादव के भाई चंद्रशेखर यादव और उसकी पत्नी रेनू यादव फर्जी डिग्री के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे थे। गुलरिहा इंस्पेक्टर रवि राय की जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद पुलिस की रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई थी।

गुलरिहा थाने के दरोगा की तहरीर पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का केस दर्ज किया गया था। उस समय पति-पत्नी महराजगंज में तैनात थे। संपत्ति की जांच के लिए बनाई गई टीम ने फर्जीवाड़ा पकड़ा था।
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एसएसपी गौरव ग्रोवर - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि प्रदेश और जिले के टॉप माफिया की सूची में शामिल बदमाशों को सजा दिलाने के लिए पुलिस कोर्ट में लगातार साक्ष्यों के साथ पैरवी कर रही है। माफिया राकेश यादव को सजा दिलाने में कामयाबी मिली है। पुलिस अन्य माफिया के ट्रायल केस में भी साक्ष्यों के साथ कोर्ट में हर तारीख पर शासकीय अधिवक्ता के जरिए पैरवी कर रही है, जल्द ही सजा की उम्मीद है।





 
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