एपी को शिकायत में बताया कि माफिया प्रदीप ने भी जमीन देने के लिए दबाव बनाया, जबकि मैं जमीन नहीं बेचना चाहता। यह सुनते ही एसपी ने अजीत से तहरीर मांग ली। बोले, सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन माफिया प्रदीप के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करने पर शिकायतकर्ता उलटे पांव अभी आने की बात कहते हुए निकल लिया। फिर नई तहरीर लेकर आया, जिसमें से माफिया का नाम हटा दिया था। एसपी ने फिर भी पूरे प्रकरण की जांच गुलरिहा पुलिस को सौंप दी है।
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साहब, हमें कोई खतरा तो नहीं
उधर, माफिया विनोद उपाध्याय पर पहला केस दर्ज कराने वाले एक शख्स एक दिन पुलिस को धन्यवाद देने के लिए पहुंचे थे। एसपी से उन्होंने शुक्रिया किया, लेकिन अगला ही सवाल था कि सर, कोई दिक्कत तो नहीं होगी। हमें कोई खतरा तो नहीं। उनका यह सवाल तब था, जब उन्हें सुरक्षा में सिपाही भी दिए गए हैं। कुछ यही हाल माफिया पर केस दर्ज कराने वाले एक अन्य व्यक्ति का भी है। पहले तो उन्होंने सही-सही तहरीर दे दी, लेकिन अब कदम भी डगमगाने लगे हैं। हालांकि, अभी सुरक्षा का आश्वासन देकर पुलिस अभी उनसे विवेचना में सहयोग ले रही है।
13 जून को माफिया राकेश यादव पर केस दर्ज कराने वाले शख्स भी डरे हुए हैं। 26 मई को माफिया ने उन्हें धमकाया था और रंगदारी मांगी थी। जबकि उसके पहले पुलिस माफिया के घर दस्तक दे चुकी थी। उन्होंने तहरीर में ही लिखा है कि माफिया पर हो रही कार्रवाई को देखकर हिम्मत आई है, लेकिन डर है कि माफिया राकेश के बाहर आने पर उनके साथ कोई अनहोनी न हो जाए।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि माफिया पर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। जो लोग भी पुलिस के पास मदद के लिए आए हैं, उन्हें सुरक्षा भी दी गई है। माफिया की कमर तोड़ने के लिए ही पुलिस-प्रशासन उनकी अवैध कमाई पर बुलडोजर भी चला रही है। माफिया का खौफ खत्म हो गया है, आज के समय में उनके अपने ही जमानत वापस लेने से नहीं डर रहे हैं। कई लोगों ने जमानत भी वापस ले ली है।