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इन लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना लॉकडाउन, जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा सामान

Wed, 06 May 2020 10:58 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
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ट्रकों के थमे पहिये ट्रांसपोर्टरों के लिए मुसीबत का सबब बने गए हैं। स्थिति यह है कि दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य प्रदेशों से माल आकर ट्रांसपोर्टरों के गोदामों में डंप पड़ा है। लोकल ट्रांसपोर्ट पर रोक की वजह से इसकी डिलीवरी नहीं हो पा रही है।
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जिला प्रशासन की ओर से ट्रांसपोर्टरों के वाहनों के लिए पास जारी करने में इतनी ज्यादा सख्ती है कि जरूरतमंदों को भी मायूस होना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने गाड़ियों की आवाजाही को सुचारू करने के साथ ही उनके लिए पास जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की है।

लोकल ट्रांसपोर्ट को सुचारू बनाए प्रशासन
गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके तिवारी ने कहा कि सामान्य तौर पर गोरखपुर में दवाएं, कपड़ा, स्टेशनरी, मोटर पार्ट्स समेत अन्य चीजें दूसरे प्रदेशों से आती हैं। सूरत, मुंबई की कपड़ा मंडी पूरी तरह से बंद होने से गोरखपुर का ट्रांसपोर्ट कारोबार एक तरह से ठप है।
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वहीं दिल्ली, गाजियाबाद, भिवंडी की फैक्ट्रियां बंद होने से सामानों की आवक बंद है। दूसरी दिक्कत यह है कि लॉकडाउन के बाद से बाहर से आया माल गोदामों में डंप हो गया है। इनकी डिलीवरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में शासन प्रशासन को अब ट्रांसपोर्टरों के सामने आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए भी कदम उठाना चाहिए।
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पास जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाए प्रशासन

गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बिल्डिंग मैटेरियल दुकानों तक तो आ जा रहा है लेकिन उसे जिले के अन्य स्थानों पर ले जाने में काफी दिक्कत हो रही है। लोकल ट्रांसपोर्ट के लिए पास बनाने की प्रक्रिया काफी कठिन है।

पास के आवेदन 80 प्रतिशत तक रिजेक्ट कर दिए जा रहे हैं। जिन गाड़ियों के लिए पास जारी भी किए जा रहे हैं, उनके लिए रूट निर्धारित कर दिया जा रहा है। इसकी वजह से लोकल स्तर पर बिल्डिंग मैटेरियल की डिलीवरी में काफी परेशानी आ रही है। प्रशासन को इस प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए।
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ऑड-ईवन फार्मूला अपना कर निकल सकता है हल

गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मनीष सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के दो चरणों में लोग काफी हद तक इसके लिए अभ्यस्त हो गए हैं। अब तो अधिकांश फैक्ट्रियां भी चलने लगी हैं। आवश्यक सेवाओं के अलावा कुछ अन्य तरह की दुकानें भी खुलने लगी हैं।

ऐसे में शासन-प्रशासन को ट्रांसपोर्ट को सुचारू करने की दिशा में भी सोचना चाहिए। क्योंकि फैक्ट्रियों से लेकर दुकानों तक की जरूरतों की पूर्ति ट्रांसपोर्ट के माध्यम से ही संभव है। इसके लिए प्रशासन को दुकानों को खोलने को लेकर ऑड-ईवन फार्मूला के बारे में सोचना चाहिए। एक-एक दिन के अंतराल पर विभिन्न दुकानों को खोलने का दिन तय कर देना चाहिए। इससे बाजारों में भीड़ भी कम होगी।
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