गोरखपुर शहर की जलनिकासी के प्रमुख साधन गोड़धोइया नाले पर लोगों ने जमकर कब्जा किया है। हालत यह है कि कई जगहों पर नाले की चौड़ाई दो से ढाई मीटर में सिमट गई है। अब जबकि नाले को 20 मीटर चौड़ा किया जाएगा। दोनों तरफ 10-10 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, तो नाले का दायरा 40 मीटर तक बढ़ेगा। जाहिर है कि ढाई मीटर से 40 मीटर तक नाले का दायरा बढ़ाने में बहुत सारे अवैध निर्माण को ध्वस्त करना होगा। इसके लिए प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।
दरअसल, नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने रविवार को नाव में बैठकर गोड़धोइया नाले का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि अधिकतर जगहों पर नाले को पाटकर लगभग खत्म कर दिया गया है। इस तरह कब्जा किया गया है कि कई जगहों पर नाले की चौड़ाई दो से ढाई मीटर तक रह गई है। यह तो नगर आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान अपनी आंखों से देखा है। नाले पर कब्जे का सच जानने के लिए नगर निगम की टीम ड्रोन कैमरे से फोटोग्राफी करा रही है। इसमें भी नाले पर कई जगहों पर काफी अतिक्रमण दिखाई दे रहा है।
वहीं, पांच पोकलेन मशीनों से गोड़धोइया नाले की सफाई की जा रही है। डीएम विजय किरन आनंद और नगर आयुक्त अविनाश सिंह के साथ नाले का निरीक्षण कर चुके हैं। रविवार को नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने छोटी नाव में बैठकर काफी दूर तक नाले का निरीक्षण किया। इस दौरान उपनगर आयुक्त संजय शुक्ला के अलावा बृजेश तिवारी मौजूद रहे। वीडियोग्राफी में नाले पर अवैध कब्जा दिखना शुरू हो गया है। कई जगहों पर नाले की चौड़ाई घटकर एक से दो मीटर रह गई है।
बता दें कि गोड़धोइया नाले को अतिक्रमणमुक्त करके 20 मीटर चौड़ा करने और दोनों तरफ 10-10 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की कवायद शासन व प्रशासन ने शुरू कर दी है। नाले की गहराई 1.5 से 2.75 मीटर तक की जानी है। नाले के सुंदरीकरण की कार्ययोजना बनाने की सीएम योगी आदित्यनाथ संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित कर चुके हैं। कई जगहों पर नाले के अस्तित्व को खत्म करने की वजह से बरसात के मौसम में बारिश का पानी निकल नहीं पाता है और शहर की कॉलोनियों में जलभराव हो जाता है।
सीएम योगी चाहते हैं कि शहर में जलभराव की समस्या न हो। इसके लिए गोड़धोइया नाले को चौड़ा करना ही पड़ेगा। सीएम ने नाले को चौड़ा करने पर जिसकी जमीन या मकान जद में आएगा उसके लिए मुआवजे की भी व्यवस्था की है। बताया जा रहा है कि जमीन अधिग्रहण पर करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। करीब 244 करोड़ रुपये से नाले का निर्माण किया जाएगा। नाले के आसपास के कुछ क्षेत्रों को गोमती रिवर फ्रंट की तरह विकसित करने की भी योजना है।