गीडा : विभिन्न प्रकार के शुल्क बने उद्यमियों के लिए परेशानी का सबब
गोरखपुर। जहां प्रदेश में उद्यमियों को परेशानी से बचाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का प्रावधान किया गया है, वहीं गीडा में अब तक सिटीजन चार्टर तक लागू नहीं है। ऐसे में उद्योग स्थापना से लेकर इसके विस्तारीकरण में कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। विभिन्न प्रकार के शुल्क के बाद अब पर्यावरण उत्तरदायी शुल्क लगाया जा रहा है। ऐसा प्रदेश के किसी भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में नहीं है।
इन दिनों गीडा के उद्यमियों के वाट्स एप ग्रुप में इन्हीं शुल्कों को लेकर एक मैसेज बहुत ही जोर शोर से चल रहा है। जिसमें इस बात का जिक्र है कि गीडा में उद्योग लगाने वालों को पांच तरह के शुल्क देने पड़ते हैं। उद्योग लगाते समय, आवंटन के दो वर्ष के बाद समय विस्तरण शुल्क, बिना मानचित्र पास कराए कुछ भी निर्माण कर लिया तो बिना मानचित्र स्वीकृत निर्माण शुल्क, आवंटन के दिनांक से रखरखाव शुल्क, वार्षिक लीज रेंट शुल्क और अब गीडा में नया शुल्क आ रहा है- पर्यावरण उत्तरदायी शुल्क। आने वाले दिनों में उद्यमी इन सारे शुल्क को देने की बजाय, गीडा से बाहर जगह लेकर उद्योग लगा लेने की बात करने लगे हैं। गीडा के उद्यमियों का कहना है कि वाट्स एप ग्रुप पर चल रहे मैसेज गीडा के उद्यमियों का दर्द बताने के लिए काफी हैं।
- गीडा में इतने तरह के शुल्क लिए जाते हैं, जिससे उद्यमी परेशान हैं। अब पर्यावरण उत्तरदायी शुल्क लेने की बात कही जा रही है। गीडा के उद्योगों के लिए सीईटीपी लगना निश्चित तौर पर जरूरी है, लेकिन इसके संचालन के लिए ऐसे उद्योगों से भी शुल्क लिया जाना, जो किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं करते हैं, यह बिल्कुल सही नहीं है। यह शुल्क सिर्फ उनसे लिया जाना चाहिए जो प्रदूषण करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी गीडा के ऐसे उद्योगों को चिह्नित किया है। ऑरेंज और रेड श्रेणी के उद्योगों से सीईटीपी के संचालन का आने वाला खर्च लिया जाना चाहिए।
- आरएन सिंह, उपाध्यक्ष, चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
- कोई भी उद्यमी अपने अपने उद्योगों को सुविधाजनक ढंग से चलाना चाहता है। जायज शुल्क देने में भी किसी भी तरह की परेशानी नहीं है, लेकिन गीडा प्रशासन की ओर से विभिन्न प्रकार के शुल्क परेशानी का सबब बनते रहते हैं। अभी पर्यावरण उत्तरदायी शुल्क लगा दिया गया है, जो कि अन्य किसी भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में नहीं है। छोटे उद्योग तो इस शुल्क को वहन नहीं कर पाएंगे। गीडा प्रशासन को ऐसे उद्योगों से इस शुल्क को लेने का प्रावधान करना चाहिए जो प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग माने जाते हैं।
- प्रवीण मोदी, महासचिव, चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
सीईटीपी लगना गीडा की सभी फैक्ट्रियों के हित में है। इसके संचालित होते रहने की जिम्मेदारी भी सभी की होगी। ऐसे में सबको इसमें अपना सहयोग देना चाहिए। जो बड़े उद्योग हैं उन पर ज्यादा शुल्क निर्धारित होगा और छोटे उद्योग हैं उन पर कम। रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को अन्य की अपेक्षा ज्यादा पर्यावरण उत्तरदायी शुल्क देना होगा। जल्द ही उद्यमियों के साथ बैठक कर इस शुल्क को तय कर लिया जाएगा।
- संजीव रंजन, सीईओ गीडा
केस-1
दीवान इंडस्ट्रीज ने अपनी फैक्ट्री का नक्शा पास कराने के लिए गीडा ऑफिस में आवेदन दिया। करीब एक महीने तक जब नक्शा पास नहीं हुआ तो मेल भेजकर इस संबंध में जानकारी चाही। लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी और उन पर बिना नक्शा पास कराए निर्माण का शुल्क लगा दिया गया। मामला मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में उठा। तो कमिश्नर ने गीडा सीईओ को इस संबंध में जानकारी मांगी है।
केस-2
गीडा औद्योगिक क्षेत्र में बहुत सी फैक्ट्रियां श्वेत श्रेणी की हैं। यानी इन फैक्ट्रियों में किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन फैक्ट्रियों को यह प्रमाणपत्र दिया है, लेकिन अब इन फैक्ट्रियों से भी पर्यावरण के बेहतर रखरखाव के नाम पर शुल्क लेने का प्रावधान किया जा रहा है। इसके विरोध में उद्यमियों के स्वर उठने लगे हैं।