बालुचेरी साड़ियां पश्चिम बंगाल के विष्णुपुर व मुर्शिदाबाद में बनती हैं। वर्ष 1965 से बनारस में भी बालुचेरी साड़ियों का निर्माण होने लगा। इन साड़ियों पर कढ़ाई के जरिये कई दृश्य उकेरे जाते हैं। फैशन को देखते हुए पिछले कुछ वर्षों से साड़ियों पर नई-नई डिजाइनें तैयार की जा रही हैं। सचिव ने बताया कि एक बालुचेरी साड़ी बनाने में एक महीने का समय लगता है।
इन मदों में है बकाया
सचिव ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से 40 लाख रुपये मार्केटिंग डेवलपमेंट का बकाया है। जबकि 1.39 करोड़ रुपये का भुगतान सन 2015-16 से विभिन्न मदों में बकाया है। बजट खादी ग्रामोद्योग बोर्ड उत्तर प्रदेश से स्वीकृत होने के बाद ही मिलता है। इसे लेकर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अपने माध्यम से बिल भेजते हैं। सभी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हो सका।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एनपी मौर्या ने बताया कि पिछले वर्षों का वित्तीय मामला है। लंबे समय से भुगतान रुका है। वर्तमान में सरकार प्राथमिकता के आधार पर बजट आवंटित कर रही है। हिसाब बनाकर गांधी आश्रम की तरफ से दिया गया था। इसे बोर्ड में भेज दिया गया था। राज्य सरकार से बजट रुका है। सरकार की तरफ से जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, भुगतान कर दिया जाएगा।