अपनी टीम के साथ मिलकर मोबाइल प्लेनेटोरियम का अविष्कार किया। शुरुआती अड़चनों के बाद अब उन्हें धीरे धीरे स्कूलों में काम तो मिल ही रहा है। गोरखपुर महोत्सव में भी मोबाइल नक्षत्रशाला आकर्षण का केंद्र रही है। कोरोना काल से पहले की बात करें तो सचिन की संस्था 6-7 लाख रुपये वार्षिक की आमदनी कर रही थी।
कोरोना काल में कोई कार्य नहीं हुआ। इस दौरान संस्था की ओर से देश की नक्षत्रशालाओं से संपर्क कर अपने प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन किया गया। इसी का परिणाम है कि हालात सामान्य होने पर वर्तमान वर्ष में तकरीबन 38 लाख रुपये का टर्न ओवर व्रतिनो टेक्नोलॉजी ने किया है।
सचिन ने बताया कि मोबाइल नक्षत्रशाला के बेस मॉडल को तैयार करने में तकरीबन चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। इससे एडवांस नक्षत्रशाला सात से आठ और अत्याधुनिक नक्षत्रशाला की कीमत 15 लाख से प्रारंभ होती है। नक्षत्रशाला को तैयार करने में बाहर ब्लैक आउट फैबरीक और अंदर भी विशेष फैबरीक का इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही ब्लोअर, 360 डिग्री प्रोजेक्शन मशीन सहित अन्य आवश्यक सामग्री की जरूरत पड़ती थी। विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम शुल्क 25-30 रुपये प्रति छात्र रखा है।
क्या है मोबाइल नक्षत्रशाला
मोबाइल नक्षत्रशाला एक आसमानी थिएटर है जो मुख्य रूप से खगोल विज्ञान और रात के आकाश के बारे में शैक्षिक और मनोरंजक शो प्रस्तुत करने या आकाशीय नेविगेशन में प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है। आकार में छोटा और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई परेशानी न होने की वजह से इसे विज्ञान के प्रति जागरूक करने के लिए बेहद पसंद किया जा रहा है। सचिन का दावा है कि सरकार की ओर से संचालित नक्षत्रशालाओं में अगर उन्हें उपकरण लगाने का मौका मिले तो वो इसे आधी से कम कीमत में लगा सकते हैं।