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राहत: एक हफ्ते में गोरखपुर जिले को मिल जाएगी कोरोना से जंग जीतने वाली टू-डीजी दवा

Tue, 18 May 2021 01:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने तैयार की टू-डीजी, जन औषधि विभाग मरीजों को उपलब्ध कराएगा दवा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। डीआरडीओ के वज्ञिानिकों की ओर से बनाई गई टू-डीजी दवा एक सप्ताह के अंदर गोरखपुर जिले में भी उपलब्ध हो जाएगी। इसके लिए जन औषधि विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। विभाग को दो दिनों के अंदर यह दवा मिल जाएगी। यह दवा सीधे दुकानदारों को अभी नहीं मिलेगी। विभाग के जरिए ही इसे अबी बंटवाया जाएगा। 
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जानकारी के मुताबितक, यह दवा अभी गंभीर मरीजों को नहीं दी जाएगी। लेकिन जिनके अंदर संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है उन्हें दी जाएगी। टू-डीजी मरीजों की जल्द रिकवरी में मदद करती है और उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता भी काफी कम कर देती है। सहायक औषधि आयुक्त एजाज अहमद ने बताया कि दवा लांच हो गई है। लांचिंग के पहले दिन विभाग को अभी दवा नहीं मिली है। लेकिन उम्मीद है कि दो दिनों के अंदर यह दवा विभाग को मिल जाएगी। 

इसके बाद इसे एक सप्ताह के अंदर जिले में भी मंगवाया जाएगा। अभी यह दवा सीधे दुकानों पर नहीं मिलेगी। विभाग के जरिए इसे बंटवाया जाएगा। इसके बाद जो फैसला शासन करेगा, उस अनुसार दवा दी जाएगी।
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घट गई रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड

ड्रग इंस्पेक्टर जयसिंह ने बताया कि संक्रमण की रफ्तार थोड़ी कर हुई है। यह वजह से रेमडेसिविर की डिमांड भी कम हो गई है। जहां पहले एक हजार वायल की प्रतिदिन डिमांड थी। वहीं अब यह संख्या घटकर 250 वायल के आस पास हो गई है। विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध है। प्रतिदिन विभाग अपने स्तर से मरीजों को डिमांड के मुताबिक इंजेक्शन उपलब्ध करा रहा है। जबकि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास भी पर्याप्त मात्रा में रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध है। ड्रग इंसपेक्टर ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन के 1200 वायल विभाग को मंगलवार को मिले। जिन मरीजों के पास डॉ. की पर्ची है उन्हें आपदा विभाग से इंजेक्शन दिया जा रहा है। 

टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की भी मांग कम हुई
ड्रग इंस्पेक्टर जयसिंह ने बताया कि जहां पहले एक दिन में 10 से 12 टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की डिमांड रहती थी। वहीं अब यह घटकर एक से दो हो गई है। इस बीच कई ऐसे भी दिन आए जब इंजेक्शन की कोई डिमांड रही ही नहीं। 
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