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गोरखपुर के मोहल्लों का हाल: बारिश का सोचकर सिहर जाते हैं लोग, खाने-पीने के पड़ जाते हैं लाले

Wed, 17 May 2023 04:03 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

ट्रांसपोर्ट नगर से सटे कान्हा उपवन नगर में करीब सात से आठ हजार की आबादी रहती है। यह इलाका राप्ती नदी से सटा हुआ है। इस इलाके में सबसे खराब स्थिति शीतला माता मंदिर से मंडी जाने वाली सड़क और नाली की है। यहां सीसी सड़क और नाली 15 साल पहले बनी थी।
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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर शहर के कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां अभी से ही लोगों को बरसात के दौरान जलभराव का सोचकर सिहरन होने लगती है। ट्रांसपोर्टनगर, कान्हा उपवन नगर, चकरा अव्वल, मुक्तेश्वरनाथ मंदिर, बर्फ खाना इलाके में रहने वाले बहुत सारे परिवार चिंतित है क्योंकि उन्हें फिर महीने भर के लिए अपना व्यापार समेटना पड़ेगा। घर छोड़ कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ेगी।

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हर साल इन लोगों को यह दुर्दशा झेलनी पड़ती है। हर बार जल निकासी का दावा नगर निगम द्वारा किया जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में इन इलाकों में घरों से सड़क तक आने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। अभी न तो बारिश है और न ही बाढ़, लेकिन घरों का पानी जमा होने लगा है। लोग कीचड़ में होकर ही आते-जाते हैं।

बारिश में बच्चे बाहर न जाएं इसलिए थोड़ा भूखा रखते हैं
इन इलाके के लोगों का कहना है कि इस समस्या का हल अगर ढूंढ लिया गया होता तो इतनी दुश्वरियां हर साल नहीं झेलनी पड़ती और बारिश से पहले धड़कने नहीं बढ़ती। अब नगर निगम की नई सरकार से उम्मीदें है कि वह इन इलाकों को डूबने से बचाएंगे।
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कान्हा उपवन नगर की रहने वाली फूलवा ने बताया कि हमें तो जलभराव में रहने की आदत हो गई है, लेकिन नई पीढ़ी इस नरक से ऊब चुकी है। पूरा इलाका बारिश के दिनों में डूब जाता है। घरों के अंदर पानी घुस जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत शौच को लेकर होती है। घर के छोटे बच्चों को थोड़ा भूखा रखते हैं, जिससे कि वह बार-बार पेशाब और शौच न जाएं। यह कहानी केवल एक बरसात की नहीं है। पिछले 20 से 22 सालों से यह नरक झेल रही हूं। लेकिन, अब तक इस समस्या का कोई हल निकल नहीं सका है। इस इलाके में लोग जून महीने में ही डरे-सहमे रहते हैं। दो से तीन माह सांसत भरी जिंदगी झेलनी पड़ती है। अब तक लोग इस इलाके में शादी करने से भी कतराने लगे हैं।
 

सिक्सलेन से ऊंची हुई सड़क, नाला बढ़ाएगा और मुसीबत

पैडलेगंज से ट्रांसपोर्टनगर के बीच सिक्सलेन की सड़क बन रही है। सड़क के दोनों तरफ नाले का भी निर्माण हो रहा है। फोरलेन बनने के बाद ट्रांसपोर्टनगर के अगल-बगल के इलाकों में जलभराव की स्थिति भयानक हो जाती थी। अब सिक्सेलन बनने से स्थिति और भी खराब हो जाएगी। क्योंकि, सिक्सलेन के दोनों तरफ नाला भी ऊंचा हो जाएगा। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर के आसपास के मोहल्ले के पानी उस नाले में नहीं गिरेंगे। इसकी वजह से इन इलाकों के लोगों की मुसीबतें और भी बढ़ने वाली है।

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15 साल पहले बनी थी सड़क और नाली
ट्रांसपोर्ट नगर से सटे कान्हा उपवन नगर में करीब सात से आठ हजार की आबादी रहती है। यह इलाका राप्ती नदी से सटा हुआ है। इस इलाके में सबसे खराब स्थिति शीतला माता मंदिर से मंडी जाने वाली सड़क और नाली की है। यहां सीसी सड़क और नाली 15 साल पहले बनी थी। नालियां पूरी तरह से टूट चुकी हैं और बारिश के मौसम में इन नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में चला जाता है।

जिनके पास पैसा हैं, उन्होंने मकान करा लिया ऊंचा
कान्हा उपवन से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर, महेवा मंडी, मिर्जापुर, चकरा अव्वल जैसे इलाकों में हर साल बरसात से लोग परेशान रहते हैं। इसी परेशानी को देखते हुए इन इलाकों के कुछ लोगों ने अपने-अपने आगे के मकान ऊंचे करा लिए हैं। जबकि, पीछे मकान का हिस्सा उसी तरह से है। लेकिन, जिनके पास पैसा नहीं हैं, वह हर साल इसे झेल रहे हैं।
 
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लोग क्या बोले

अब तो मन करता है कि घर बेचकर कहीं और चली जाऊं। 20 साल पहले शादी हुई तो उसी दौरान यह सड़क और नाली बनी थी। तभी से यहां पानी लगता आ रहा है। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हो सका। मुश्किल है यह कि घर खरीदने वाला कोई भी नहीं मिल रहा है। -लकी, कान्हा उपवन नगर।

बंद कर देता हूं गैराज, छतों पर रहते हैं लोग
बरसात का मौसम आते ही चिंता शुरू हो जाती है कि अब व्यापार बंद करना पड़ेगा। पूरा गैराज बंद करना पड़ता है। ऐसे पिछले 15 सालों से करना पड़ रहा है। गैराज के सामने नाव चलानी पड़ती है। हम लोगों का तो कुछ हद तक ठीक है। लेकिन, मोहल्ले के अंदर रहने वाले लोग छतों पर रहने को मजबूर रहते हैं। -अजफल, गैराज मालिक, चकरा अव्वल।



घर में घुस जाता है पानी
मोहल्ले में बरसात के समय 10 से 15 दिनों तक पानी जमा रहता है। घर में पानी घुस जाता है। मजबूरी में छत या फिर ज्यादा दिक्कत होने पर रिश्तेदार के यहां जाना मजबूरी हो जाती है। पता नहीं कब तक यह सांसत झेलनी पड़ेगी। -सोनी, ट्रांसपोर्ट नगर।

500 से ज्यादा लोगों के काम धंधे हो जाते हैं बंद
नगर निगम अगर चाहती तो इस समस्या का हल हो जाता, लेकिन निगम के अधिकारी रूचि ही नहीं दिखाते हैं। हर बरसात में हमें अपना ठिकाना बदलना पड़ता है। 500 से अधिक लोगों का काम धंधा चौपट हो जाता है। लेकिन, इस पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। -रामेश्वर सहनी, कान्हा उपवन नगर।


 
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