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छावनी क्रॉसिंग की कहानी: गोरखपुर शहरवासियों के लिए बड़ी उलझन, ये क्रॉसिंग हमेशा क्यों रहती है बंद

Thu, 08 Jun 2023 04:07 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

बड़हलगंज के रहने वाले 72 वर्षीय नर्वदेश्वर तिवारी सेना में सूबेदार पद से रिटायर हैं। गठिया का मरीज होने के चलते उनको चलने फिरने में दिक्कत होती है। वह मंगलवार को एयरफोर्स अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के लिए घर से निकले थे।
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छावनी क्रॉसिंग पर जाम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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छावनी रेलवे क्रॉसिंग के सुबह से शाम तक कई बार में घंटों तक बंद रहने से परेशान बुजुर्ग, स्कूली बच्चे, मरीज और अन्य राहगीर यह कहने को मजबूर हैं कि बड़ी उलझन है..ये क्रासिंग बंद ही रहती है। बंद क्रासिंग से परेशान होना छावनी रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी तरफ झरना टोला व उसके आसपास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की नियति बन चुकी है। उन्हें शहर में आने के लिए आए दिन लंबे समय तक क्रॉसिंग का फाटक बंद होने के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि छावनी रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल जाएगी।

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बड़हलगंज के रहने वाले 72 वर्षीय नर्वदेश्वर तिवारी सेना में सूबेदार पद से रिटायर हैं। गठिया का मरीज होने के चलते उनको चलने फिरने में दिक्कत होती है। वह मंगलवार को एयरफोर्स अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के लिए घर से निकले थे।

अस्पताल समय से पहुंच जाएं इसलिए उन्होंने कचहरी बस स्टेशन से ई-रिक्शा बुक कर लिया। दोपहर तकरीबन 12 बजे छावनी रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंचे तो क्रॉसिंग का गेट बंद हो चुका था। पहले तो उन्होंने कुछ देर इंतजार किया लेकिन जब आधे घंटे बाद तक क्रॉसिंग का फाटक नहीं खुला तो वह मजबूरी में चालक को भुगतान कर पैदल ही अस्पताल जाने के लिए निकल लिए।
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एक घंटे तक क्रॉसिंग पर फंसा रहा

ई-रिक्शा चलाकर परिवार को भरण-पोषण करता हूं। झरना टोला से सवारी लेकर कूड़ाघाट जाने के लिए निकला था। करीब एक घंटे तक क्रॉसिंग पर फंसा रहा। फाटक खुलने में समय लगने पर सवारी उतर कर उस पार चली गई। यह दिक्कत आए दिन की हो गई है। : विष्णु, ई-रिक्शा चालक।

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लंबे समय तक बंद रहती है क्रॉसिंग
झरना टोला के पास लालगंज कॉलोनी में रहता हूं। क्रॉसिंग बंद होने से आए दिन परेशानी झेलनी पड़ती है। एक के बाद एक करके सात से आठ ट्रेनों के गुजरने से लंबे समय तक क्रॉसिंग बंद रहती है। जिससे शहर जाने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। : जयनाथ, स्थानीय निवासी।

एयरफोर्स गेट से पैदल सफर करना पड़ा
बेटा आर्मी में है। देवरिया से एयरफोर्स अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने आया था। क्रॉसिंग का फाटक बंद होने से एयरफोर्स गेट से किसी वाहन के नहीं मिलने पर पैदल ही आना पड़ा। कूड़ाघाट जाकर देवरिया घर जाने के लिए बस पकड़ूंगा। : राम अवध यादव।
 
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ट्रेनों की संख्या बढ़ने से बढ़ी परेशानी

सेना से रिटायर होने के बाद वर्ष 1998 में एयरफोर्स अस्पताल के समीप गायत्रीनगर कॉलोनी में मकान बनवाकर रहने लगा। पहले क्रॉसिंग का फाटक बहुत देर बंद नहीं रहता था, लेकिन अब ट्रेनों की संख्या बढ़ने से समय काफी बढ़ गया है। इससे काफी दिक्कत होती है। : भान प्रताप सिंह, गायत्रीनगर।

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ओवरब्रिज निर्माण की मांग लंबे समय से
झरना टोला में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहता हूं। अक्सर काम पड़ने पर शहर जाना पड़ता है, लेकिन छावनी रेलवे क्रॉसिंग काफी देर तक बंद होने से परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग कर रहे हैं। : चंद्रमोहन पांडेय, स्थानीय निवासी।

24 घंटे में गुजरती हैं करीब 147 ट्रेनें
नरकटियागंज से आने वाली एक लाइन और देवरिया की तरफ से आने वाली दो लाइन से ट्रेनें रेलवे छावनी की क्रॉसिंग से होकर गुजरती हैं। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार 24 घंटे में इस रूट से करीब 147 ट्रेनें गुजरती हैं। इस क्रॉसिंग के फाटक पर आठ-आठ घंटे पर तीन शिफ्ट में तीन गेटमैन की ड्यूटी लगाई जाती है

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