गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान गोरखपुर (एम्स) में मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने की तैयारी शुरू की जाएगी। बड़े शहरों के निजी अस्पतालों की तुलना में एम्स में विदेश से आने वाले मरीजों का इलाज सस्ती दर पर होगा, जबकि इन मरीजों का खर्च सामान्य मरीजों की तुलना में कुछ अधिक रहेगा।
सार्क देशों और गल्फ कंट्री के लोगों को इलाज में वरीयता दी जाएगी। इसे लेकर एम्स जल्द ही एक नीति (पॉलिसी) तैयार करेगा। भारत में इलाज अन्य देशों की तुलना में सस्ता है। विदेशों में जांच और बड़े ऑपरेशन कराने में लोगों को भारी रकम खर्च करनी पड़ती है, इसलिए वे देश के बड़े शहरों में इलाज के लिए आते हैं। ऐसे शहरों में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण भीड़ लग जाती है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि एम्स को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए मेडिकल टूरिज्म एक बड़ा और प्रभावी विकल्प है। इस पर एम्स ने काम करना शुरू कर दिया है। विदेशी मरीजों का इलाज वरीयता के आधार पर किया जाएगा और इसके लिए पॉलिसी तैयार की जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे देशभर के बड़े संस्थानों में इलाज पर होने वाले खर्च का अध्ययन करें। इसी आधार पर एम्स में विदेशी मरीजों के लिए इलाज के रेट तय किए जाएंगे, ताकि वे बड़ी संख्या में एम्स की तरफ रुख कर सकें।