विशाखा कमेटी की जांच में प्रशासनिक अफसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद एम्स प्रशासन के सामने एक नई परेशानी आ गई है। एम्स प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा है कि आरोपी अफसर पर केस वह स्वयं दर्ज कराए या छात्रा से करवाए।
छात्रा के भविष्य और कानूनी दांवपेच को देखते हुए पहले वरिष्ठ अधिवक्ता से सलाह लेने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि विधिक सलाह लेने के पीछे की एम्स प्रशासन की मंशा है कि मामले से जुड़े सबूत और तथ्यों की जांच करा ली जाए और कुछ कमी रह गई हो तो उसे एकत्र किया जाए।
प्रशासनिक अफसर पर लगे आरोपों की जांच के लिए बनी नौ सदस्यीय कमेटी गठित ने आरोपी अफसर के अलावा आरोप लगाने वाली छात्रा, कई कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और छात्र-छात्राओं से भी पूछताछ की। कमेटी के सदस्यों ने इन सबके अलग-अलग बयानों पर भी चर्चा की।
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इसके बाद अपनी रिपोर्ट बनाई, जिसे शुक्रवार को ही कार्यकारी निदेशक को सौंपना था, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कमेटी के सदस्यों ने फिर बैठक की। इसके बाद निर्णय लिया गया कि रिपोर्ट शनिवार को सौंपी जाएगी। शनिवार सुबह भी कमेटी ने कई बिंदुओं पर विचार विमर्श किया। इसके बाद कार्यकारी निदेशक को इससे अवगत कराया गया। कार्यकारी निदेशक इसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी के साथ गवर्निंग बॉडी के प्रेसिडेंट देश दीपक वर्मा के पास पहुंचे। वहां भी लंबी वार्ता चली।