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गोरखपुर एम्स प्रकरण: विधिक सलाह...केस दर्ज AIIMS करवाए या छात्रा

Sun, 14 Jan 2024 10:54 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

एमबीबीएस छात्रा द्वारा एम्स के एक प्रशासनिक अफसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले की जांच के दौरान विशाखा कमेटी के सामने कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पता चला है कि आरोपी अधिकारी ने इसके पहले कई महिला सुरक्षाकर्मियों का भी यौन उत्पीड़न किया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विशाखा कमेटी की जांच में प्रशासनिक अफसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद एम्स प्रशासन के सामने एक नई परेशानी आ गई है। एम्स प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा है कि आरोपी अफसर पर केस वह स्वयं दर्ज कराए या छात्रा से करवाए।

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छात्रा के भविष्य और कानूनी दांवपेच को देखते हुए पहले वरिष्ठ अधिवक्ता से सलाह लेने का निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि विधिक सलाह लेने के पीछे की एम्स प्रशासन की मंशा है कि मामले से जुड़े सबूत और तथ्यों की जांच करा ली जाए और कुछ कमी रह गई हो तो उसे एकत्र किया जाए।

प्रशासनिक अफसर पर लगे आरोपों की जांच के लिए बनी नौ सदस्यीय कमेटी गठित ने आरोपी अफसर के अलावा आरोप लगाने वाली छात्रा, कई कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और छात्र-छात्राओं से भी पूछताछ की। कमेटी के सदस्यों ने इन सबके अलग-अलग बयानों पर भी चर्चा की।
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इसे भी पढ़ें: प्रशासनिक अफसर पर यौन उत्पीड़न के आरोप सही, प्रतिनियुक्ति समाप्त

इसके बाद अपनी रिपोर्ट बनाई, जिसे शुक्रवार को ही कार्यकारी निदेशक को सौंपना था, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कमेटी के सदस्यों ने फिर बैठक की। इसके बाद निर्णय लिया गया कि रिपोर्ट शनिवार को सौंपी जाएगी। शनिवार सुबह भी कमेटी ने कई बिंदुओं पर विचार विमर्श किया। इसके बाद कार्यकारी निदेशक को इससे अवगत कराया गया। कार्यकारी निदेशक इसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी के साथ गवर्निंग बॉडी के प्रेसिडेंट देश दीपक वर्मा के पास पहुंचे। वहां भी लंबी वार्ता चली।

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पीड़िता का कॅरिअर प्रभावित न हो, यह भी चिंता
इस मामले में अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर किसकी ओर से लिखवाया जाए। पीड़िता या एम्स प्रशासन। इसमें तकनीकी मामला यह है कि छात्रा ने जो घटना स्थल बताया है, वह एम्स परिसर स्थित प्रशासनिक भवन है। एक पक्ष यह था कि अन्य लोगों को कड़ा संदेश देने के लिए एम्स प्रशासन को ही इस मामले में केस दर्ज कराना चाहिए, लेकिन, यहां बड़ी बाधा यह है कि जो आरोप लगाए गए हैं, उससे संबंधित सबूत और अन्य जानकारी पीड़िता ही दे सकती है।

इस पर भी तय नहीं हो पाया कि केस पीड़िता दर्ज कराए और एम्स प्रशासन उसकी विधिक मदद करे। क्योंकि डर है कि पीड़िता पढ़ाई की बजाय कानूनी दांव पेच में उलझकर रह जाएगी। इससे उसका कॅरिअर प्रभावित होगा। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एम्स पटना के विधिक सलाकार से राय ली गई। उनकी सलाह के बाद पूरे मामले में किसी वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ से राय लेने पर सहमति बनी है।


 
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