गोरखपुर शहर में जहां कहीं भी बांस-बल्ली पर विद्युत सप्लाई चल रही है, वह सब बिजली विभाग के अभियंताओं की विभागीय अवैध संतानें है। अभियंताओं ने खुद भ्रष्टाचार में लिप्त होकर नागरिकों को गैर-कानूनी तरीके से बांस-बल्ली पर लटकाकर बिजली पहुंचा दी। यह बात नगर विधायक डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल ने कही।
नगर विधायक रविवार को उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता से लेकर एसडीओ तक के अधिकारियों के साथ जोनल कार्यालय में बैठक की।
नगर विधायक ने कहा कि आखिर हाईटेंशन तारों के नीचे मकान कैसे बन गए और किन अभियंताओं ने सबकुछ अनदेखी करके नियम विरुद्ध तरीके से उन घरों को बिजली के कनेक्शन दिए, जबकि नियमतः ऐसे मकानों का विद्युतीकरण करना ही दंडनीय अपराध है। लेकिन अभियंताओ ने सब-कुछ जानबूझकर भ्रष्टाचार में लिप्त होकर ऐसा किया।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि अब जब नागरिक डर के कारण इन तारों को हटाने की बात कहते हैं तो उन्हें लंबा-चौड़ा बिल थमा दिया जाता है, जो नियमतः सही भी है। नागरिक घूस भी देता है और बाद में नियमितीकरण कराने के लिए पैसा भी जमा करता है।
नगर विधायक ने कहा कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने उनकी मांग पर बिजनेस प्लान 2020-21 में रू 1.83 करोड़ स्वीकृत किया है। वह यह बैठक यह सुनिश्चित करने के लिए कर रहे हैं कि इस पैसे से 100 प्रतिशत काम हो।
नगर विधायक ने सभी अभियंताओं को निर्देशित किया कि वे आगामी 15 दिनों में पूरे नगरीय क्षेत्र में नागरिकों से संपर्क करके खराब या क्षमता वृद्धि के योग्य ट्रांसफार्मरों, बांस-बल्ली पर दिए गए कनेक्शनों, जर्जर तारों तथा पोलों एवं मकानों के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन वायरों को बदलवाने या हटवाने के संदर्भ में विस्तृत योजना तैयार करे।
बैठक में मुख्य अभियंता देवेन्द्र सिंह, अधीक्षण अभियंता यू सी वर्मा, अधिशासी अभियंता ( नवनीत कुमार, मुदित तिवारी, विनोद चौधरी, यदुनाथ राम ) तथा एसडीओ ( मुकेश गुप्ता, अमन तिवारी, अजय कुमार, प्रद्युम्न सिंह, आरके सिंह, नीरज दूबे, विवेक सिंह और राहुल तिवारी) आदि उपस्थित थे।