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गोरक्षनगरी और मणिपुर के बीच मिटी सांस्कृतिक दूरियां, सांस्कृतिक विरासत का हुआ आदान प्रदान

Sun, 20 Dec 2020 04:52 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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केंद्रीय विद्यालय संगठन - फोटो : अमर उजाला
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देश के विभिन्न राज्यों में एकता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के तहत केंद्रीय विद्यालय नंबर एक एयरफोर्स ने सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए अनूठी पहल की है। इसके तहत 2500 किलोमीटर दूर मणिपुर की राजधानी इंफाल स्थित केंद्रीय विद्यालय लेमाखुंग के बच्चों से गूगल मीट के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को न केवल साझा किया, बल्कि दोनों राज्यों की भावनात्मक एकता ओर सामाजिक ताने बाने को मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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शुक्रवार को आयोजित हुए कार्यक्रम में दोनों ही विद्यालयों के 100 से अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया और एक दूजे की समृद्ध संस्कृति तथा विरासत, खान पान, हस्तकलाओं, धार्मिक स्थलों और रीति रिवाजों के बारे में जानकारी हासिल की। दो घंटे के कार्यक्रम की शुरूआत गोरक्षनगरी के विद्यार्थियों ने भोजपुरी में अभिवादन तो मणिपुर के विद्यार्थियों मणिपुरी में अभिवादन करके की।

उसके बाद गोरखपुर के विद्यार्थियों ने गोरखनाथ मंदिर के आध्यात्मिक महत्व, नाथ पंथ के साथ शहीद स्मारकों, प्राचीन मंदिरों के बारे में जानकारी प्रदान की। वैसे ही मणिपुर के विद्यार्थियों ने वहां के तीर्थ स्थलों के आध्यात्मिक महत्वों पर प्रकाश डाला।
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एक दूजे को दिया आने का निमंत्रण

कार्यक्रम के दौरान केवी लेमाखुंग के प्रधानाचार्य ने केवी नंबर एक एयरफोर्स के विद्यार्थियों और शिक्षकों को मणिपुर आने का न्योता दिया। वैसे ही गोरक्षनगर के विद्यार्थियों ने मणिपुर के विद्यार्थियों को अपने यहां शैक्षिक भ्रमण पर आने का निमंत्रण दिया। दोनों ही विद्यालयों के प्रधानाचार्य ने भी इस पर सहमति जताई।

लेमाखुंग इंफाल केवी के प्रधानाचार्य विपुल सरकार ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य दोनों राज्यों के बीच रचनात्मक संपर्कों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। यह राष्ट्र की मजबूती और एकता का एक महत्वूपर्ण कारक बनेगा। गोरक्षनगरी के बारे में किताबों में पढ़ा है, जल्द ही इस दिव्य नगरी के दर्शन करने आऊंगा।

नंबर एक एयरफोर्स केंद्रीय विद्यालय प्रधानाचार्य एसके श्रीवास्तव ने कहा कि देश की विविधता में हमारी एकता है। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच संपर्कों को बढ़ाना है। कभी यहां के लोगों को वहां जाना पड़े तो भाषा किसी प्रकार की अड़चन न बनें। एक सरल शब्दावली तैयार करना है ताकि भारत की सभी भाषाओं के बारे में कामचलाऊ ज्ञान हो सके।

 
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