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गोरखपुर में जाम: गोलघर में बिजली-टेलीफोन वाले मेहरबान तो सड़क तक दुकान, पोल की आड़ में कर रखा है कब्जा

Tue, 26 Dec 2023 01:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो शिवम सिंह, गोरखपुर।

सार

मुख्य अभियंता बिजली निगम आशु कालिया ने कहा कि बाजारों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगवाए गए थे। लोग अपना दायरा बढ़ाकर आगे बढ़ते चले गए होंगे और आसपास कब्जा कर अपना निर्माण करवा लिए होंगे। निगम का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को प्रभावी बनाए रखने के साथ विद्युत सुरक्षा पैमाने पर किसी तरह की लापरवाही न हो पाए, इसकी निगरानी करना होता है।
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शहर की सबसे बड़ी इमारत भी कब्जे से पीछे नहीं हटी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सिस्टम की लापरवाही को अपने फायदे में बदलने और उसे बरकरार रखकर सरकारी जगह पर कब्जा जमाने की बीमारी धीरे-धीरे पूरे बाजार में फैलती जा रही है। गोलघर में तो कब्जों के नए-नए तरीके अपनाए गए हैं। कहीं करीब 12 फीट का गलियारा दीवार-चैनल लगाकर कब्जा किया गया है तो कहीं गलियारा दुकान में ही समा चुका है। जो पूरा गलियारा या सड़क कब्जाने की हिम्मत अभी नहीं जुटा पा रहे, उन्होंने खंभों की आड़ में जेनरेटर लगाकर रास्ता बंद कर दिया है।

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कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने खंभों तक ऊंची दीवार लगाकर पूरी सड़क को ही अपने कॉम्पलेक्स तक जोड़ दिया है। बिजली-टेलीफोन स्टाफ की मेहरबानी से दुकानदार धड़ल्ले से कब्जे जमाए हैं तो अफसर आंखें फेरे हुए है। यही वजह है कि जाम से शहरवासी परेशान हैं और पुलिस, प्रशासन, नगर निगम चाहकर भी इससे छुटकारे के ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहा है।

 

गोलघर। - फोटो : अमर उजाला।
कब्जे बरकरार रहें और मनमानी चलने के साथ विभागों पर सवाल भी खड़े न हों, इसलिए बीच सड़क पर गड़े खंभों को हटाने की बजाय नगर निगम, बिजली निगम और टेलीफोन विभाग आपस में चिट्ठी-चिट्ठी खेल रहे हैं। जगह-जगह खंभों और ट्रांसफार्मर को जानबूझकर ऐसा लगाया गया कि उसकी आड़ में कब्जा हो सके। गोलघर की पूरी सड़क को देर रात या सुबह के वक्त देखें तो सारा खेल समझ में आ जाएगा।

गोलघर की सड़क पर कब्जे के खेल को समझने के लिए अमर उजाला की टीम ने एक-एक प्वाइंट को बारीकी से देखा। कचहरी चौक से आगे गोलघर की तरफ बढ़ते ही शराब की दुकान के सामने ही बिजली का एक तिरछा पोल दिखा। चंद कदम की दूरी पर दूसरा पोल भी सड़क पर ही गड़ा था। सड़क से तीन फीट आगे करके पोल लगाया गया है और उसके बगल में औचित्यहीन हो चुके टेलीफोन के खंभे, बॉक्स लगे हुए हैं।

 

गोलघर में अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला।
गलियारा भी नजर आता है, लेकिन चंद कदम आगे बढ़ने पर करीब 15 फीट आगे बढ़कर बिजली निगम ने अपना दफ्तर बना लिया है। अब इसके बाद देखें तो इसे ही मानक बनाकर उसके बगल के दुकानदारों ने भी दुकान को आगे बढ़ा लिया है। यहीं से आप को बिजली विभाग का खेल समझ में आने लगेगा। जानबूझकर बिजली के खंभों को आगे बढ़ाकर लगाया गया है, ताकि उसकी आड़ में कब्जा किया जा सके।

अब यहां से अतिक्रमण हटा लिया भी जाए, लेकिन जब तक पोल को सही जगह पर शिफ्ट नहीं किया जाएगा, फिर से चौड़ी सड़कें अपने स्वरूप में नहीं आ पाएंगी। इसी प्रकार सड़क के दाहिने ओर पर नजर डालने पर गलियारा ही खत्म नजर आया। पोल का जाल यहां भी एक लाइन से सड़क के किनारे नजर आया।

अब थोड़ा आगे बढ़ने पर एक पुराने होटल के बगल में ही सड़क पर पांच फीट बढ़कर ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है। चंद कदम आगे बढ़ने पर फिर गांधी आश्रम के पास ही एक बड़ा ट्रांसफार्मर सड़क पर लगा है। शाम होते ही ट्रांसफार्मर के पास ठेले लग जाते हैं।
 

गणेश चौराहा पर पोल का जाल। - फोटो : अमर उजाला।
गणेश चौराहा भवन : गलियारे में स्थायी निर्माण, जेनरेटर से कब्जा, सड़क पर खंभों का जाल
सोमवार की सुबह 10 बजे के करीब यहां पर कुछ कर्मचारी झाड़ू लगा रहे थे। देखते ही कहते हैं, गलियारा हमारा है...इसका किराया देते हैं। साथ में दो अन्य लोग मौजूद थे, वह भी यही बताते हैं, लेकिन आगे बढ़ते ही उसमें से दो लोग अलग आकर बताते हैं। भइया..वहां तो झूठ बोल रहे थे। पूरा कब्जा ही है। वीर बहादुर सिंह जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने आकर गलियारे की सराहना की थी। लेकिन, अब उसका स्वरूप बदल गया है। यह वाकया गणेश चौराहा से इंदिरा बाल विहार तक भवन का है। यहां पर भी कब्जा और बिजली के खंभे का यही हाल है। गलियारा तो यहां पर बचा है, लेकिन किसी दुकानदार ने सीढ़ी बना ली है तो किसी ने अपना जेनरेटर लगा दिया है।

फुटपाथ से आगे बढ़कर एक लाइन से बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, जिसकी आड़ में कोई गुटखा बेच रहा है तो कोई दुकान को आगे तक बढ़ाकर उसपर मालिकाना हक जता रहा है। गलियारे में एक भी दुकान ऐसी नहीं है, जो यह कह सके कि मैंने कब्जा नहीं किया है। वहीं, गणेश चौराहे से काली मंदिर जाने वाले रास्ते पर भवन के गलियारे में दो स्थायी निर्माण हो चुके हैं। जेनरेटर और सड़क पर खंभों का जाल यहां पर भी नजर आ रहा है।


 

सिटी मॉल रोड पर खंभों की आड़ में कब्जा। - फोटो : अमर उजाला।
गणेश चौराहा से सिटी मॉल रोड...खंभे और मंदिर की आड़ में कब्जे
गणेश चौक से सिटी मॉल रोड पर भी गलियारा खत्म हो गया है। गणेश चौक से इस रोड पर जैसे आगे बढ़ेंगे बाईं तरफ गलियारा नजर आएगा। लेकिन, इसमें किसी ने जेनरेटर तो किसी ने अपने शोरूम की सीढ़ी बना ली है। कुछ आगे बढ़ने पर यहां पर गलियारा पूरी तरह से खत्म चुका है। यहां पर भी सड़क से दो फीट आगे बढ़कर बिजली के खंभों को लगाया गया है। सिटी मॉल के आगे जाने पर जब गणेश चौक की ओर नजर दौड़ाएंगे तो करीब सात फीट कब्जा नजर आएगा। पोल की आड़ में यहां पर भी बड़े-बड़े भवन वालों ने कब्जा कर लिया है और उसे इतने सलीके से किया है कि देखने पर यही नजर आएगा कि उन्होंने ही जमीन आम लोगों के लिए छोड़ दी है।
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गोलघर में अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला।
मुख्य अभियंता बिजली निगम आशु कालिया ने कहा कि बाजारों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगवाए गए थे। लोग अपना दायरा बढ़ाकर आगे बढ़ते चले गए होंगे और आसपास कब्जा कर अपना निर्माण करवा लिए होंगे। निगम का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को प्रभावी बनाए रखने के साथ विद्युत सुरक्षा पैमाने पर किसी तरह की लापरवाही न हो पाए, इसकी निगरानी करना होता है। वैसे भी अब तो शहर में अधिकतर जगह भूमिगत केबल बिछाए जाएंगे। आने वाले समय में सिर्फ ट्रांसफार्मर और भूमिगत केबल ही रहेगा।
 
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