सीमावर्ती क्षेत्र के अंतर्गत दोनों देशों के नागरिक कई वर्षों से अपने सगे संबंधियों के यहां जाते रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन करीब 300 भारतीय पर्यटक वाहन नेपाल जाते हैं। भंसार शुल्क के बाद परमिट के बढ़ने से भारतीय यात्रियों और पर्यटकों को नेपाल यात्रा में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। व्यापारी नेता सुभाष जायसवाल ने बताया कि नेपाल सरकार प्रतिदिन कोई न कोई नियम लगा कर भारतीयों को परेशान कर रही है।
नेपाली वाहनों से नहीं वसूला जाता है शुल्क
नेपाल सरकार ने यह शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव बजट में किया था। जिसे सोमवार से लागू किया गया है। सोनौली सहित नेपाल से जुड़ी सभी सीमाओं पर लागू कर दिया गया है। इसके विपरीत भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाले नेपाली नंबरों के वाहनों की सिर्फ कस्टम इंट्री होती है। नेपाली वाहनों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।
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सोनौली निवासी नीरज कुमार ने कहा कि नेपाल सरकार भारतीय दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर पहले शुल्क बढ़ा दिया और फिर परमिट पर तीन गुना टैक्स लगाकर राजस्व बढ़ाने की सोच रही है, लेकिन इससे पर्यटकों की संख्या में कमी होगी। यह कदम सही नहीं है।
नौतनवां निवासी रवि कुमार जायसवाल ने कहा कि पहले दो पहिया वाहन पर भैरहवा से आगे जाने पर परमिट नहीं बनाना पड़ता था। अब भंसार बनाने के बाद भैरहवा जाकर आरटीओ परमिट बनाना होगा। जिससे भारतीय वाहन स्वामियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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सोनौली निवासी संजीव कुमार ने कहा कि पहले व्यापारियों को परेशान किया जा रहा था, अब भारतीय पर्यटक और कामगारों को परेशानी होगी। बहुत से ऐसे कामगार हैं, जो बाइक से प्रतिदिन सीमावर्ती क्षेत्र से नेपाल के विभिन्न फैक्ट्री और कंपनी में काम करने सुविधा और भंसार कराकर जाते हैं।
सोनौली निवासी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि बाइक पर परमिट गलत है। इस पर नेपाल सरकार को विचार करना चाहिए। पहले कार के लिए लुंबिनी और बुटवल जाने पर परमिट की आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन अब लुंबिनी और सिद्ध बाबा दर्शन के लिए जाने पर भी परमिट की आवश्यकता होगी। यह ठीक नहीं है।