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नेपाल जाना हुआ महंगा: वाहनों का परमिट शुल्क बढ़ा, सरकार के नए आदेश से भारतीयों की जेब हो रही ढीली

Tue, 18 Jul 2023 04:52 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।

सार

सीमावर्ती क्षेत्र के अंतर्गत दोनों देशों के नागरिक कई वर्षों से अपने सगे संबंधियों के यहां जाते रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन करीब 300 भारतीय पर्यटक वाहन नेपाल जाते हैं। भंसार शुल्क के बाद परमिट के बढ़ने से भारतीय यात्रियों और पर्यटकों को नेपाल यात्रा में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
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इंडो नेपाल बार्डर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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भारत से नेपाल जाना अब और महंगा हो गया है। पड़ोसी देश ने वाहनों का परमिट शुल्क बढ़ा दिया है। फैसला सोमवार से लागू हो गया। नए नियम के मुताबिक अब दो पहिया वाहनों को 150 नेपाली रुपये के स्थान पर 500 रुपये और चार पहिया वाहनों को 500 नेपाली रुपये के स्थान पर 700 रुपये देने होंगे। नेपाल ने दो महीने पूर्व ही वाहनों के प्रवेश शुल्क (भंसार) में इजाफा किया था।

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जानकारी के मुताबिक, पहले बुटवल और लुंबिनी तक जाने के लिए वाहनों का परमिट नहीं लेना पड़ता था। अब वहां जाने के लिए भी वाहन का परमिट लेना होगा। बुटवल और लुंबिनी से आगे जाने के लिए परमिट लेना अनिवार्य था। नेपाल कैबिनेट ने अब नए नियम को मंजूरी दे दी है, जिसे सोमवार से लागू कर दिया गया। इसके मुताबिक, दो पहिया वाहन के परमिट शुल्क में 350 नेपाली रुपये की और चार पहिया वाहन के परमिट शुल्क में 200 नेपाली रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है।

दो माह पूर्व नेपाल ने दो और चार पहिया वाहनों के प्रवेश शुल्क (भंसार) में बढ़ोतरी किया था। दो पहिया वाहन का प्रवेश शुल्क 150 रुपये (नेपाली) से बढ़ाकर 200 रुपये किया गया था, जबकि चार पहिया वाहन के शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये (नेपाली) कर दिया गया था। भैरहवा भंसार कार्यालय सूचना अधिकारी युवराज भटराई ने बताया कि भंसार शुल्क में वृद्धि के बाद यातायात विभाग ने परमिट शुल्क में वृद्धि कर दिया है। नया नियम सोमवार से लागू हो गया।
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सीमावर्ती क्षेत्र के अंतर्गत दोनों देशों के नागरिक कई वर्षों से अपने सगे संबंधियों के यहां जाते रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन करीब 300 भारतीय पर्यटक वाहन नेपाल जाते हैं। भंसार शुल्क के बाद परमिट के बढ़ने से भारतीय यात्रियों और पर्यटकों को नेपाल यात्रा में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। व्यापारी नेता सुभाष जायसवाल ने बताया कि नेपाल सरकार प्रतिदिन कोई न कोई नियम लगा कर भारतीयों को परेशान कर रही है।

नेपाली वाहनों से नहीं वसूला जाता है शुल्क
नेपाल सरकार ने यह शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव बजट में किया था। जिसे सोमवार से लागू किया गया है। सोनौली सहित नेपाल से जुड़ी सभी सीमाओं पर लागू कर दिया गया है। इसके विपरीत भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाले नेपाली नंबरों के वाहनों की सिर्फ कस्टम इंट्री होती है। नेपाली वाहनों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।

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सोनौली निवासी नीरज कुमार ने कहा कि नेपाल सरकार भारतीय दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर पहले शुल्क बढ़ा दिया और फिर परमिट पर तीन गुना टैक्स लगाकर राजस्व बढ़ाने की सोच रही है, लेकिन इससे पर्यटकों की संख्या में कमी होगी। यह कदम सही नहीं है।
 

 
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लोगों ने क्या कहा

नौतनवां निवासी रवि कुमार जायसवाल ने कहा कि  पहले दो पहिया वाहन पर भैरहवा से आगे जाने पर परमिट नहीं बनाना पड़ता था। अब भंसार बनाने के बाद भैरहवा जाकर आरटीओ परमिट बनाना होगा। जिससे भारतीय वाहन स्वामियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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सोनौली निवासी संजीव कुमार ने कहा कि पहले व्यापारियों को परेशान किया जा रहा था, अब भारतीय पर्यटक और कामगारों को परेशानी होगी। बहुत से ऐसे कामगार हैं, जो बाइक से प्रतिदिन सीमावर्ती क्षेत्र से नेपाल के विभिन्न फैक्ट्री और कंपनी में काम करने सुविधा और भंसार कराकर जाते हैं।

सोनौली निवासी सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि बाइक पर परमिट गलत है। इस पर नेपाल सरकार को विचार करना चाहिए। पहले कार के लिए लुंबिनी और बुटवल जाने पर परमिट की आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन अब लुंबिनी और सिद्ध बाबा दर्शन के लिए जाने पर भी परमिट की आवश्यकता होगी। यह ठीक नहीं है।



 
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