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सरकारी स्कूल में घिनौनी करतूत: पीड़ित छात्राएं बोलीं- होमवर्क देने के बहाने बुलाकर 'बैड टच' करता था टीचर

Sat, 03 Jan 2026 03:55 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

एक पीड़िता ने बताया कि शुरू में वह बहुत डर गई थी। रोज-रोज की हरकतों से मन घबरा जाता था। स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। टीचर उन्हें देखकर मुस्कुराता और गंदे इशारे करता था। कई बच्चियों ने बताया कि डर और शर्म की वजह से वह लंबे समय तक चुप रहीं। लगातार हो रही हरकतों से परेशान होकर आखिरकार छात्राओं ने हिम्मत जुटाई और अपने माता-पिता को पूरी बात बता दी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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बेलघाट थाना क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में छात्राओं के साथ घिनौनी करतूत ने लोगों को झकझोर दिया है। पीड़ित छात्राओं ने बताया कि बदतमीजी करने के बाद आरोपी टीचर अगले दिन उन्हें देखकर मुस्कुराता था। उन्हें गंदे इशारे करता था। पीड़ित छात्राओं ने बताया कि टीचर उन्हें होमवर्क देने या कॉपी जांचने के बहाने पास बुलाकर बैड टच करता था।
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उधर, परिजनों और पीड़ित छात्राओं से बातचीत में जो तथ्य सामने आए, वे न सिर्फ आरोपी शिक्षक की हैवानियत को उजागर करते हैं, बल्कि स्थानीय पुलिस की शुरुआती ढिलाई पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अगर शिकायत के बाद पहले दिन ही शिक्षक पर कार्रवाई हो गई होती तो छात्राएं मानसिक यातना से बच जातीं।

पीड़ित छात्राओं ने बताया कि 56 वर्षीय शिक्षक नवल किशोर लंबे समय से उनके साथ गंदी हरकतें कर रहा था। वह चौथी और पांचवीं कक्षा की बच्चियों को होमवर्क देने या कॉपी जांचने के बहाने पास बुलाता था। अकेला पाकर मोबाइल फोन में अश्लील फोटो और वीडियो दिखाता फिर उनके साथ बैड टच (अश्लील हरकत) करता था। मना करने पर डांटता-पीटता और धमकी देता था कि अगर किसी को बताया तो मारेंगे।

एक पीड़िता ने बताया कि शुरू में वह बहुत डर गई थी। रोज-रोज की हरकतों से मन घबरा जाता था। स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। टीचर उन्हें देखकर मुस्कुराता और गंदे इशारे करता था। कई बच्चियों ने बताया कि डर और शर्म की वजह से वह लंबे समय तक चुप रहीं।
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लगातार हो रही हरकतों से परेशान होकर आखिरकार छात्राओं ने हिम्मत जुटाई और अपने माता-पिता को पूरी बात बता दी। परिजनों ने बताया कि जब उन्होंने शिक्षक से पूछताछ की तो उसने साफ इन्कार कर दिया और कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं करता। इसके बाद 26 दिसंबर को परिजनों ने बेलघाट थाने में शिकायत की।

स्कूल जाने से कतराने लगी थीं बच्चियां
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। औपचारिकता निभाते हुए आरोपी को हिरासत में लिया गया, लेकिन बिना प्राथमिकी दर्ज किए ही छोड़ दिया गया। इससे छात्राओं और उनके परिवारों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया। बच्चियों पर मानसिक दबाव बढ़ने लगा। कुछ बच्चियां स्कूल जाने से भी कतराने लगीं।
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