गिलोय स्वरस 20 ग्राम में 1 ग्राम पिप्पली चूर्ण तथा एक चम्मच मधु मिलाकर सुबह व शाम को प्रयोग करें। इससे जीर्ण ज्वर, कास, अरुचि प्लीहा रोग आदि नष्ट होते हैं। गिलोय के स्वरस में पाषाणभेद का चूर्ण 2 ग्राम मिलाकर एक चम्मच शहद के साथ दिन में तीन चार बार चाटने से मूत्रकृच्छ रोग मिटता है। गिलोय के रस का गुड़ के साथ सेवन करने से कब्ज मिटता है।
मिश्री के साथ सेवन करने से पित्त के उपद्रव शांत होते हैं। मधु के साथ सेवन करने से कफ से निजात मिलती है, सोंठ के साथ सेवन करने से आमवात नष्ट होता है। काली मिर्च और उष्ण जल के साथ सेवन करने से भी लाभ मिलता है। कोविड-19 के कम लक्षण वाले रोगियों में भी आयुष मंत्रालय द्वारा संशमनी वटी के नाम से इसे प्रयोग करने की अनुमति दी गई है।
डायिबिटीज मरीज ऐसे करें गिलोय का सेवन
गिलोय के कुछ पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह से पानी से धो लें। इन पत्तों को 400 मिली लीटर पानी में उबालें, पानी को तब तक उबालें जब तक पानी आधा ना रह जाए। अब इस पानी को छानकर गिलास में कर लें। गिलास में 2 से 3 चुटकी काली मिर्च पाउडर डालें, एक दिन में ये पानी 10 से 15 मिली तक दिन में दो बार लें।
नियमित इसका सेवन करने से शुगर लेवल कंट्रोल रहेगा। गिलोय का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, ज्यादा सेवन करना हानिकारक हो सकता है। अगर किसी को गंभीर समस्या है तो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।