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Gorakhpur News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सात कार्यदिवस में चार्जशीट दाखिल

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- गीडा पुलिस ने फॉरेंसिक व एफएसएल साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में दाखिल किया आरोप पत्र
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- एसपी नॉर्थ की मॉनिटरिंग में जांच पूरी, आरोपी पहले ही भेजा जा चुका है जेल

गोरखपुर। गीडा थाना क्षेत्र में नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने महज सात कार्यदिवस में चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले में आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भिजवाया जा चुका है। पुलिस ने फॉरेंसिक साक्ष्य और एफएसएल रिपोर्ट को शामिल कर केस को मजबूत बनाया है। एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र इस पूरे प्रकरण की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आरोपी को कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी के निर्देश दिए हैं।
सिकरीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव का एक दंपती अपनी नौ वर्षीय बेटी के साथ गीडा क्षेत्र के एक गांव में किराए के कमरे में रहकर मजदूरी करता है। उनके कमरे के ठीक सामने ही पीपीगंज निवासी सत्य प्रकाश पासवान भी किराए पर रहता था, जो मजदूरी करता है। आरोप है कि 15 अप्रैल की शाम को जब दंपती काम पर गए हुए थे और बच्ची घर पर अकेली थी। तभी आरोपी युवक ने उसे बहला-फुसलाकर अपने कमरे में बुला लिया और दुष्कर्म किया। बच्ची के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। प्रभारी निरीक्षक गीडा अश्वनी पांडेय ने बताया कि पीड़िता के पिता की तहरीर के आधार पर आरोपी सत्य प्रकाश पासवान के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता पर रखा गया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण, फॉरेंसिक जांच और एफएसएल रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल करते हुए सात कार्यदिवस में चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी। उनका कहना है कि प्रभावी पैरवी कर जल्द से जल्द आरोपी को सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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पांच दिन में चार्जशीट, 16 दिन में आरोपियों को मिली थी सजा
पीपीगंज पुलिस ने भी छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सात दिन के भीतर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। बीते 21 फरवरी की रात को पीपीगंज थाना क्षेत्र में शादी समारोह में आई छह वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी हुई थी। पुलिस ने ''''ऑपरेशन कनविक्शन'''' के तहत साक्ष्य संकलन की कार्यवाही मात्र पांच दिनों में पूरी की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी अशोक निषाद को गिरफ्तार किया था। इस मामले में साक्ष्य छिपाने के आरोप में आरोपी की मां सुनीता देवी को भी गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था जहां उसे उन्हें जेल भेजा गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट अशोक कुमार यादव की अदालत ने केवल 16 कार्य दिवसों में सुनवाई पूरी कर 31 मार्च 2026 को फैसला सुनाया।
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जिसमें अदालत ने अशोक निषाद को आजीवन कारावास (शेष जीवन तक) और 55,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साक्ष्य मिटाने वाली मां को 4 साल की कठोर कारावास की सजा मिली थी।
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