कोरोना संक्रमित किशोर के जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट 10 दिन बाद भी नहीं आई है। जबकि किशोर की बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में इलाज के दौरान 15 दिसंबर को मौत हो चुकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अब तक यह नहीं जान पाया है कि किशोर किस वैरिएंट से पीड़ित था। इसे लेकर मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोम एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी) आईजीआईबी को पत्राचार किया है।
जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन दिसंबर को एचआईवी पॉजिटिव कोविड संक्रमित किशोर को भर्ती किया गया था। 12 दिन तक उसका इलाज कोविड वार्ड में चला। जांच में पता चला कि उसे काफी दिनों से खांसी आ रही थी। पीलिया की शिकायत थी।
इस बीच उसका इलाज शुरू हुआ, लेकिन उसे आराम नहीं मिला। इस पर जब डॉक्टरों ने जब उसकी हिस्ट्री पूछी तो पता चला कि उसके पिता और मां एचआईवी संक्रमित हैं। पिता की एचआईवी से मौत भी हो चुकी है। इस पर डॉक्टरों ने किशोर की 29 नवंबर को एचआईवी जांच की तो वह भी पॉजिटिव निकला। इसके बाद उसकी कोरोना जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद आठ दिसंबर को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नमूना लिया गया। लेकिन, अब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि किशोर के जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। अगर रिपोर्ट आ जाती तो यह जानकारी मिल जाती कि आखिर किस वैरिएंट का असर किशोर के शरीर पर पड़ा है। फिलहाल इसे लेकर फिर से पत्राचार किया गया है।