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Gorakhpur News: घर से कूड़ा उठाने के लिए जीडीए वसूलेगा रकम, प्राधिकरण तय करेगा शुल्क

Fri, 30 Dec 2022 02:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह का कहना है कि फर्म, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने के साथ ही इसे डंपिंग ग्राउंड तक भी ले जाएगी। साथ ही सड़क पर मैनुअल एवं मशीन से झाडू़ लगाई जाएगी। नालियों की सफाई का जिम्मा भी फर्म के पास होगा।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : Social Media
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विस्तार
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अपनी कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के साथ ही व्यावसायिक कांप्लेक्स में सफाई के लिए नगर निगम की ही तरह आमजन से शुल्क ले सकता है। इस पर मंथन चल रहा है। शुल्क निर्धारण पर आखिरी फैसला जीडीए बोर्ड बैठक में होगा।

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हालांकि सफाई को लेकर आने वाला पूरा खर्च इससे नहीं निकलेगा। प्राधिकरण को अपने दूसरे स्रोतों से इसकी भरपाई करनी पड़ेगी। फिलहाल 10 जनवरी से निजी फर्म जीडीए कॉलोनियों, कांप्लेक्स, हरित क्षेत्र एवं पार्कों की सफाई का जिम्मा संभाल लेगी।

नियमित सफाई, कूड़ा उठान और पार्कों की देख-रेख के लिए फर्म को प्राधिकरण हर महीने 34.22 लाख यानी सालाना 4.11 करोड़ रुपये देगा। प्राधिकरण ने टेंडर प्रक्रिया के तहत सफाई की जिम्मेदारी जेएस एनवायरो प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी है। संबंधित फर्म को सफाई का ठेका 2,026 तक के लिए दिया गया है। इन तीन सालों में जीडीए फर्म को 12.32 करोड़ रुपये देगा।
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जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह का कहना है कि फर्म, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने के साथ ही इसे डंपिंग ग्राउंड तक भी ले जाएगी। साथ ही सड़क पर मैनुअल एवं मशीन से झाडू़ लगाई जाएगी। नालियों की सफाई का जिम्मा भी फर्म के पास होगा।

पौधों की छंटाई व सफाई से लेकर पानी के छिड़काव का काम भी, सफाई का अधिकार पाने वाली फर्म को करना है। घरों से कूड़ा उठाने के लिए लोगों से शुल्क लेने पर मंथन चल रहा है। शुल्क का निर्धारण बोर्ड बैठक में होगा, तब तक फर्म अनुबंध के मुताबिक सफाई करती रहेगी।

नहीं होती थी नियमित सफाई
अभी संसाधन सीमित होने की वजह से जीडीए की कॉलोनियों में नियमित सफाई नहीं हो पाती है। प्राधिकरण ने आउटसोर्सिंग पर कुछ सफाई कर्मचारी रखे हैं जो चार-पांच दिन पर शिफ्टवार इन कॉलोनियों में सफाई करने जाते हैं या फिर शिकायत पर पहुंचते हैं। गोलघर स्थित जीडीए कांप्लेक्स और देवरिया बाईपास किनारे बुद्ध विहार व्यावसायिक में बने कांप्लेक्स में तो कई-कई दिनों तक सफाई ही नहीं हो पाती है।
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