जीडीए और मेसर्स केआर एम्यूजमेंट एंड रिसोर्ट्स के बीच 28 अक्तूबर 2005 को करार हुआ था। इस करार से संबंधित पूरक करार 19 अक्तूबर 2007 को हुआ था। पूर्व जीडीए उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार ने दोनों करार को आठ नवंबर 2019 को निरस्त कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि चंपा देवी पार्क को लेकर अनुबंध की शर्तों का साझेदारों ने उल्लंघन किया है।
पार्क जीडीए की संपत्ति है। इसका संचालन करने वालों का अस्तित्व सिर्फ कस्टोडियन के रूप में है। करार का मकसद पार्क का समुचित रखरखाव, वाटर पार्क एवं एन्वायरमेंटल पार्क को विकसित करना था। मगर अनुबंध की शर्तें तोड़कर वहां पांच विवाह घर संचालित किए जा रहे थे।
अनुबंध में पार्क का एक एकड़ हिस्सा सार्वजनिक लोगों के लिए छोड़ने को कहा गया था। वहां पाथ-वे बनाना था। मगर उस हिस्से पर भी बाउंड्रीवाल करा लिया गया। सभी गेटों पर सिक्योरिटी गार्ड बैठा दिए गए जिससे आम आदमी पार्क के भीतर पहुंच ही नहीं पाता। प्राधिकरण रोहित अग्रवाल को मूल आवंटी मानता है।
उसका कहना है कि रोहित ने गलत तरीके से बिना प्राधिकरण को सूचित किए दूसरे पार्टनर बना लिए, जिसके बाद उन्होंने रोहित को सिर्फ दो फीसदी का हिस्सेदार बना, पार्क का संचालन खुद करने लगे। कोर्ट के आदेश पर प्राधिकरण ने साझेदारों को जो नोटिस भेजा है उसमें भी ये सभी प्रमुख बिंदु है, जिसपर साझेदारों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
नोटिस में प्राधिकरण ने यह भी उल्लेख किया है कि कोर्ट के आदेश के क्रम में किए गए पत्राचार को आधार मानकर दूसरे साझेदार, वाटर पार्क पर किसी तरह के पट्टे का अधिकार नहीं जता सकते। नोटिस में कहा गया है कि मेसर्स केआर एम्यूजमेंट एवं रिसोर्ट्स के प्रबंधन को यह भी स्पष्ट किया जाता है कि प्राधिकरण के मूल आवंटी रोहित अग्रवाल, नूतन अग्रवाल तथा भूपेंद्र विक्रम सिंह ही हैं, इसमें बाकी कथित व्यक्तियों का नाम प्राधिकरण के पत्राचार में आने से उनका किसी प्रकार का पट्टाधारी हक नहीं बनता।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में वाटर पार्क के साझेदारों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। 24 फरवरी की शाम चार बजे तक उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नीर निकुंज (वाटर पार्क) साझेदार दीपक अग्रवाल ने कहा कि नोटिस प्राप्त हुई है। अध्ययन करने के बाद तय समय के भीतर फर्म अपना पक्ष रखेगी।