बिजली निगम ने दो साल पहले भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के दौरान अधिकारियों पर आरोप सिद्ध पाया है। शिकायत के आधार पर पूर्वांचल वितरण मंडल के सभी 27 जिलों के 44 अधिकारियों पर जांच की गई थी। इसमें 32 अधिकारी दोषी या आंशिक रूप से दोषी पाए गए हैं। सभी पर दो साल पहले अलग अलग कामों में लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप था।
2018 में बिजली निगम के अधिकारियों पर संविदा कर्मियों का उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, गबन, समेत कई गंभीर आरोप लगे थे। मामला ऊर्जा मंत्री के संज्ञान तक भी पहुंचा था। पूरे मामले की जांच कराई गई। इसमें शामिल सभी नामों को अलग अलग वर्ग में रखा गया है।
जांच में जो अधिकारी पूरी तरह से दोषी पाए गए हैं उन्हें भी चिह्नित किया गया है। इसके अलावा जिन पर आरोप लगे थे और जांच में उनकी भूमिका नहीं पाई गई, उन्हें दोषमुक्त भी किया गया है। बनारस और भदोही के अधिकारियों और कार्रवाई पर जांच का ठीकरा अधिक फूटा है। प्रयागराज के चार तकनीकी कर्मचारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे जो जांच में पूरी तरह निराधार पाए गए।
तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शहरी दोषमुक्त
गोरखपुर शहरी क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार वर्मा ( एके सिंह) पर कई बार आरोप लगाए गए। शहरी क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबल बिछाने के मामले में उन पर भी आरोप लगे थे। इस मामले में ही उनका तबादला भी किया गया था, लेकिन जांच के दौरान एके सिंह पूरी तरह दोषमुक्त पाए गए। गोलघर समेत शहर के कई इलाकों में लगभग 30 करोड़ रुपये से अंडरग्राउंड केबल बिछाने के नाम पर धांधली सामने आई थी।
तीन बार निरस्त हुई थी कार्रवाई
जय किशोर शर्मा 2018 में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता कुशीनगर थे। इसके बाद बस्ती में मुख्य अभियंता के तौर पर इनका तबादला किया गया। सूत्रों की मानें तो इस दौरान तीन बार निगम के आलाधिकारी की तरफ से इन पर कार्रवाई के लिए लेटर भेजा गया था, लेकिन सरकार के एक मंत्री के दखल की वजह से बार बार कार्रवाई से बच गए। इस बार जांच में पूरी तरह इन पर आरोप सही पाए गए।
पूर्वांचल वितरण निगम प्रबंध निदेशक के बालाजी ने कहा कि अभी कोई लिस्ट ऐसी नहीं आई है। लेकिन भ्रष्टाचार जैसे मामलों पर लखनऊ मुख्यालय कार्रवाई कर रहा है। ऐसे मामलों को विद्युत निगम बहुत सख्ती से ले रहा है। भ्रष्टाचार के ही एक मामले में दोषी पाए जाने पर मिर्जापुर के अधिकारी पर भी कार्रवाई की गई थी।
इन पर हुई कार्रवाई
- आंशिक दोषी ( तत्कालीन)
-अरविंद कुमार कार्यालय सहायक- तृतीय भदोही
-अरविंद कुमार खंडीय लेखाकार - वाराणसी
-अशोक कुमार तत्कालीन अवर अभियंता- गोरखपुर
-अमर सिंह अधिशासी अभियंता तत्कालीन- भदोही
-संजीव कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन अधिशासी अभियंता- वाराणसी
-अभिषेक कुमार उपखंड अधिकारी- भदोही
-अरविंद सिंह तत्कालीन अधिशासी अभियंता- वाराणसी
-अरविंद कुमार सिंह मुख्य अभियंता एवं वितरण- भदोही
-दिनेश कुमार सिंह तत्कालीन मुख्य अभियंता - वाराणसी
-धर्मेंद्र सिंह अधिशासी अभियंता - वाराणसी
-हेमंत कुमार सिंह तत्कालीन उपखंड अधिकारी- गोरखपुर
-कमल चंद कार्यालय सहायक - भदोही
-आरके श्रीवास्तव लेखाकार- भदोही
-सुमन कुमार वर्मा अवर अभियंता - गोरखपुर
-संजय सिंह कार्यालय सहायक- भदोही
-विकास गुप्ता कार्यालय सहायक- वाराणसी
-विनोद कुमार मिश्रा अधीक्षण अभियंता- वाराणसी
और लोगों के भी हैं नाम...
तत्कालीन
- पुनीत कुमार निगम खंड अधिकारी द्वितीय- गोरखपुर ( जांच में आधा दोषी पाए गए)
- अभय नारायण सिंह उपखंड अधिकारी गोरखपुर( जांच पेंडिंग)
पूर्ण दोषी ( तत्कालीन)
-राजेंद्र प्रसाद गुप्ता अवर अभियंता- कुशीनगर
-एसके सिंह अधीक्षण अभियंता- भदोही
-जय किशोर शर्मा- अधीक्षण अभियंता - कुशीनगर
एक्स पार्टी (जांच में प्रपत्र नहीं जमा किया)
-अखिलेश कुमार चौहान कार्यालय सहायक- भदोही
-बनवारी लाल कार्यालय सहायक- भदोही
-भरत राम कार्यालय सहायक- भदोही
-गजराला शिवशंकर लेखाकार वाराणसी
-रजित राम वर्मा तत्कालीन कार्यालय सहायक भदोही
-राकेश कुमार पाठक कार्यालय सहायक भदोही
मृतक ( तत्कालीन)
-बासुकी नाथ तिवारी सहायक अभियंता- आजमगढ़
-किशोरी लाल लेखाकार- बस्ती