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Gorakhpur: गोरखपुरवासी लगा रहे गुहार, साहब! हमने अवैध कॉलोनी में जमीन ले ली है, अब क्या होगा

Sat, 12 Nov 2022 10:19 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

70 से अधिक लोग शुक्रवार को जीडीए कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर व सचिव उदय प्रताप सिंह के साथ ही जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह से मुलाकात की और अपनी दलील देते हुए, पूछा कि अब इन कॉलोनियों का क्या भविष्य होगा।
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गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार
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विस्तार
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साहब! हमें जानकारी नहीं थी, खुद के घर की चाह में जमीन खरीदी थी। अब पता चला कि जमीन जिस कॉलोनी में है, वह अवैध है। सर! जब प्लाटिंग की थी तो जमीन गोरखपुर विकास प्राधिकरण के दायरे से बाहर थी। यही वजह है कि ले-आउट नहीं स्वीकृत करा सका। कई प्लाट बिक चुके हैं। लोग परेशान हैं। अब क्या होगा ?

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ऐसे कई सवालों के साथ शुक्रवार को पूरे दिन कई कॉलोनाइजर व आमजन, जीडीए अफसरों- अभियंताओं के कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। अनियोजित विकास पर लगाम लगाने के लिए जीडीए अपने नए विस्तारित क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग कर बसाई जा रही कॉलोनियों को चिह्नित कर रहा है।

सर्वे में ड्रोन की भी मदद ली जा रही है। अब तक 26 अवैध कॉलोनियां चिह्नित हो चुकी हैं। सर्वे का काम पूरा होने के बाद ऐसी सभी कॉलोनियों पर बुलडोजर चलेगा। साथ ही प्राधिकरण इनके नाम अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करेगा।  
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प्राधिकरण की तरफ से अवैध कॉलोनियों की पहली सूची जारी करते ही, इन्हें बसाने वाले और यहां जमीन ले चुके लोगों में खलबली मच गई है। 70 से अधिक लोग शुक्रवार को जीडीए कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर व सचिव उदय प्रताप सिंह के साथ ही जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह से मुलाकात की और अपनी दलील देते हुए, पूछा कि अब इन कॉलोनियों का क्या भविष्य होगा।

उपाध्यक्ष ने बताया कि जीडीए की मंशा सिर्फ अनियोजित विकास को रोकना है। विस्तारित क्षेत्र में नियोजित तरीके से विकास हो इसलिए ऐसी अवैध कॉलोनियों, निर्माण पर अभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो इनका जाल फैल जाएगा और बाद में कार्रवाई में मुश्किल होगी।

 उन्होंने कहा कि यदि भू-उपयोग सही है और संबंधित कॉलोनाइजर/ जमीन कारोबारी ले-आउट स्वीकृत करा लेते हैं, तो इन्हें वैध किया जा सकता है। उधर इन कॉलोनियों में जमीन खरीदने वाले कई लोग, कॉलोनी बसाने वाले लोगों पर दबाव बनाने लगे हैं कि वे रुपये वापस करें।
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