गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की 10 से 25 साल पुरानी फ्लॉप संपत्तियों की विक्रय कीमत कम करने के लिए बोर्ड ने एक कमेटी गठित कर दी है। इसमें प्राधिकरण के वित्त अधिकारी के अलावा अपर निदेशक कोषागार होंगे।
कमेटी लखनऊ विकास प्राधिकरण एलडीए समेत दूसरे प्राधिकरणों द्वारा फ्लॉप संपत्ति को बेचने के लिए तैयार फार्मूले का अध्ययन करेगी ताकि नियमों की अनदेखी और जीडीए को नुकसान न हो। इसके साथ ही फ्लॉप संपत्तियों के संबंध में जीडीए ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय किया है। एक अप्रैल से जीडीए की सभी संपत्तियों का मूल्य 15 फीसदी तक बढ़ जाता है। मगर इन फ्लॉप संपत्तियों के रेट इस बार नहीं बढ़ाए जाएंगे।
कमेटी इन संपत्तियों की कीमत फिर से तय कर उसका प्रस्ताव तैयार करेगी जिसे अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद प्राधिकरण संबंधित संपत्तियों की कीमत कम करेगी। माना जा रहा है कि प्राधिकरण की इन फ्लॉप संपत्तियों के रेट 25 से 40 फीसदी तक कम किए जा सकते हैं।
इसके लिए संबंधित संपत्ति के निर्माण के समय उसकी कीमत के अलावा कितनी बार उसकी नीलामी के प्रयास हुए और पुरानी होने पर उसकी कितनी कीमत होगी, आदि का आंकलन करने के बाद नए सिरे से रेट तय किए जाएंगे। संशोधित रेट पर संबंधित संपत्तियों की नीलामी शुरू की जाएगी।
बता दें कि प्राधिकरण अपनी इन फ्लॉप संपत्तियों को बेचने के लिए आठ से 21 बार नीलामी प्रक्रिया अपना चुका है मगर हर बार मायूसी हाथ लगी है। गोलघर स्थित जीडीए टॉवर की 36 संपत्तियों के लिए जहां आठ बार, वहीं विकास नगर की पांच दुकानों की 21 बार निलामी का प्रयास हो चुका है। इसी तरह राप्तीनगर की 14 और नवीन ट्रांसपोर्टनगर की 16 दुकानों की बिक्री के लिए 17 बार नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई।
जीडीए के सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि फ्लॉप संपत्तियों का नया रेट तय करने के लिए बोर्ड ने एक कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी एलडीए आदि प्राधिकरणों द्वारा अपनी फ्लॉप संपत्ति को बेचने के लिए अपनाए गए फार्मूले का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी जिसके बाद इसे अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।