गांव वालों के मुताबिक, मोनू के बाबा सीताराम के मुंह में तमंचा डालकर 27 फरवरी को जान से मारने की कोशिश की गई थी, लेकिन गोली मिस हो गई थी और सीताराम बच गए थे। पुलिस ने तब केस दर्ज किया था।
कीर्तन जारी, लेकिन ग्रामीणों की भीड़ नहीं
हनुमान मंदिर पर कीर्तन में शामिल होने के लिए ही तीनों युवक जा रहे थे लेकिन, वारदात हो गई। इसके बाद कीर्तन तो जारी है, लेकिन ग्रामीण वहां से हट गए। कोई अस्पताल तो कोई पीड़ित परिवार के घर पहुंच गया।
पुलिस ने जब भी मारपीट को हल्के में लिया, हुई बड़ी घटना
पिपराइच के हरखापुर में हत्या पुरानी रंजिश में पहली बार नहीं हुई। इसके पहले बेलीपार के कनईल गांव के पूर्व प्रधान व हिस्ट्रीशीटर शशि मौली शुक्ला को भी बदमाशों ने इसी अंदाज में गोली मारी थी। पुलिस ने जब भी मारपीट की घटनाओं को हल्के में लिया है तो इसी तरह की वारदात उभर कर सामने आई है।