शिकायत पर नवंबर 2021 में तत्कालीन डीएम के आदेश पर महादेव झारखंडी में सीलिंग की जमीन की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि भू-माफियाओं ने 130 से अधिक लोगों को 25 एकड़ सीलिंग की जमीन बेच दी है। बाद में डीएम के आदेश पर कैंट पुलिस ने इस मामले में प्रॉपर्टी डीलर पवन, कॉलोनाइजर के संचालक रामलाल पासवान, उनकी पत्नी सिमिरती देवी, भाई रमाशंकर, सहयोगी जगदीश यादव, उनकी पत्नी आशा के खिलाफ केस दर्ज किया। सभी को पुलिस ने धोखाधड़ी, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम का आरोपी बनाया था। जांच में यह भी सामने आया था कि कोर्ट से रोक के बाद जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई थी।
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केस दो
14 फरवरी 2023 को चौरीचौरा थाने में देवरिया जिले के हरखौली गांव के दिनेश सिंह ने बहरामपुर के कमलेश यादव व पत्नी मीना पर जालसाजी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। दिनेश सिंह को जो जमीन बेची गई थी, वह सीलिंग की थी। दरअसल, दिनेश के पुत्र ने एक जमीन बैनामा कराया। बिना बताए ही विक्रेता ने सीलिंग की जमीन बेच दी। प्रशासन की ओर से चौरीचौरा व सदर तहसील क्षेत्रों में सीलिंग के गाटे सार्वजनिक किए जाने के बाद उन्हें जालसाजी की जानकारी हो सकी। इसके बाद उन्होंने केस दर्ज कराया। इस मामले में रुपये वापस पाने की चाहत में आज भी दिनेश सिंह पुलिस आफिस के चक्कर लगा रहे हैं।
केस तीन
रजही के रहने वाले विजय मौर्या ने कोनी में एक जमीन का बैनामा कराया। विजय ने खतौनी में दर्ज नाम के आधार पर रामबचन चौरसिया से जमीन का बैनामा कराया। 12.50 लाख रुपये चुकाने के बाद जब जमीन पर कब्जा करने गए तो पता चला कि जमीन सीलिंग की है। अब वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। रुपये वापस पाने के लिए बेचने वाले से संपर्क किया तो उसने रुपये वापस करने का भरोसा दिया। लेकिन, रुपया कब और कैसे वापस होगा, यह सोचकर वह परेशान हैं। विजय कहते हैं, रुपया नहीं मिला तो केस दर्ज कराएंगे।
जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद 1961 में सीलिंग एक्ट लागू किया गया। कानून बनने के बाद एक परिवार को 15 एकड़ से ज्यादा सिंचित भूमि रखने का अधिकार नहीं है। असिंचित भूमि के मामले में यह रकबा 18 एकड़ तक है। इसे बेचा नहीं जा सकता। सिर्फ गरीबों को पट्टा किया जा सकता है।
गोरखपुर जिले में 2500 से अधिक गाटे सीलिंग के
गोरखपुर जिले में 2500 से अधिक गाटे सीलिंग के हैं। इनमें कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर चौरीचौरा और सदर तहसील के हैं। चौरीचौरा में सबसे अधिक 1620 गाटे और करीब 1000 गाटे सदर तहसील में हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रफल की बात करें तो जिले में 500 एकड़ से अधिक सीलिंग की जमीन है।
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प्रशासन के खुद के रिकार्ड दुरुस्त नहीं, राजस्व कर्मियों की भूमिका घेरे में
सीलिंग की जमीन का पूरा ब्यौरा सीएल-7 पंजिका में दर्ज किया जाना चाहिए। मगर प्रशासन की यह सीलिंग पंजिका डेढ़ दशक से अधिक समय से अपडेट नहीं है। यहां तक की सुप्रीम कोर्ट से सीलिंग की जमीन के जिन मामलों में आदेश हुआ, राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों ने उन्हें भी इस पंजिका पर दर्ज नहीं किया। महादेव झारखंडी के मामले में वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय लोगों के पक्ष में फैसला किया था।
सीलिंग के गाटे सार्वजनिक होने के बाद शुरू हुई जांच में पता चला कि यह आदेश भी सीएल-7 पंजिका में दर्ज नहीं था। तीन महीने पहले प्रशासन ने जिस सीलिंग पंजिका से गाटे सार्वजनिक किए, नामांतरण के दौरान राजस्व विभाग ने उसका उपयोग नहीं किया। बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री हुई और धड़ल्ले से सीलिंग मुक्ति की रिपोर्ट भी दी गई। सभी के नामांतरण होते रहे।
इसको लेकर राजस्व कर्मी तरह-तरह के तर्क दे रहे हैं, लेकिन लोगों का सीधा सवाल है कि जब राजस्व कर्मी किसी जमीन को सीलिंग की होने या न होने का पता नहीं लगा सके तो आम आदमी कैसे जान पाएगा? लोगों का कहना है कि नामांतरण के समय गलत रिपोर्ट देने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
जिला प्रशासन का दावा है कि तहसील प्रशासन की ओर से दी गई समय सीमा में यदि सक्षम न्यायालय या किसी सक्षम अधिकारी की ओर से जारी सीलिंग मुक्ति के आदेश का वैध प्रमाण संबंधित द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया तो ऐसी जमीन सीलिंग की मानी जाएगी। इसमें यदि नामांतरण हो चुका है, तो उसे निरस्त कर दिया जाएगा और जमीन को सरकार में निहित कर दिया जाएगा। सही दस्तावेज मिलने पर इसे सीलिंग से बाहर रखा जाएगा।
ऐसे बच सकते हैं सीलिंग की जमीन से
कलेक्ट्रेट कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता जंग बहादुर सिंह ने बताया कि भूमि के बारे में जानने के लिए खतौनी बड़ा आधार होती है। भूमि खरीदते समय क्रेता को खतौनी का ठीक से अध्ययन करना चाहिए। यदि खतौनी में संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है, तो उस जमीन को खरीदा-बेचा जा सकता है। हालांकि व्यवस्था में थोड़ा सुधार कर खतौनी में इसी के साथ यह भी दर्ज हो जाए कि कितनी भूमि सीलिंग की है, तो खरीदार और आसानी से सचेत हो जाता। इसके अलावा सीलिंग की जमीन का पता लगाने के लिए सीएल-7 पंजिका को भी जांच लेना चाहिए। सीलिंग के सभी गाटे, इस पंजिका में दर्ज किए जाते हैं।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि सीलिंग या जमीन संबंधित जालसाजी के मामले सामने आने पर पुलिस कानूनी कार्रवाई करती है। जालसाजी के मामलों में पुलिस पिछले छह महीने में 401 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। 12 भू-माफियाओं पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की गई है, इस गिरोह में शामिल 35 लोगों को जेल भेजा गया। इसके अलावा पेशेवर 16 जालसाजों की हिस्ट्रीशीट भी खोली गई है। जहां कहीं से भी शिकायत सामने आती है, पुलिस सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है।
मुख्य राजस्व अधिकारी सुशील कुमार गोंड ने कहा कि सीलिंग की जमीन के मामले में सभी का आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया था। विस्तृत जांच पड़ताल के बाद जो सही होगा, उसी के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी के पक्ष में सक्षम न्यायालय का आदेश होगा तो सीलिंग पंजिका से उसका नाम हटाया जाएगा। यदि सही आधार नहीं बनता है तो जमीन से कब्जा हटाकर उसे सुरक्षित किया जाएगा। डीएम द्वारा मेरी अध्यक्षता में नामित कमेटी सभी आपत्तियों का अध्ययन का उसका निस्तारण करेगी। इसके लिए तहसीलों के निस्तारण आख्या मांगी गई है। प्रत्येक सप्ताह में एक या दो दिन तय कर कमेटी, आपत्तियों का निस्तारण करेगी।