फाइलेरिया से बचाव के लिए मार्च और अप्रैल माह में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) के तहत 50 लाख लोगों को निशुल्क दवा खिलाई जाएगी। यह दवा दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और अति गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी को खानी है। मौजूदा समय में जिले के 2,332 मरीजों का इलाज चल रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि प्री-एमडीए कार्यक्रम के तहत जिले में 4041 लोगों की फाइलेरिया की जांच की गई थी, जिनमें से तीन मरीज मिले थे। एमडीए कार्यक्रम के तहत 1940 फाइलेरिया मरीज मिले थे। इनमें से 483 मरीजों को को-मार्बिडिटी मैनेजमेंट किट ( बाल्टी, मग, साबुन, तौलिया और एंटी फंगल क्रीम) दिया गया।
उन्होंने बताया कि मार्च और अप्रैल माह में 50 लाख स्वस्थ व्यक्तियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम के तहत एल्बेंडाजोल और डीईसी टेबलेट खिलाई जाएगी। पांच साल तक लगातार दवा के सेवन से फाइलेरिया का खतरा न के बराबर है।
फाइलेरिया के लक्षण
हाथ, पैर में सूजन। पुरुषों में हाइड्रोसील की परेशानी भी होती है।
यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है, जो गंदे पानी में पैदा होते हैं।
फाइलेरिया जैसी बीमारी में सामान्य तौर पर मौत तो नहीं होती, लेकिन होने वाली दिव्यांगता से जिंदगी बदतर हो जाती है।