आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए चयन होने के बाद भी प्रवेश प्रक्रिया पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। जिस वजह से अप्रैल में पहले चरण की लॉटरी होने के बावजूद अभी तक 20 फीसदी बच्चों का प्रवेश ही प्राइवेट स्कूलों में हो सका है। जबकि पहले चरण में चयनित विद्यार्थियों की संख्या 2196 और दूसरे चरण की 689 है। वहीं तीसरे चरण की लॉटरी 20 जुलाई को प्रस्तावित है।
कोरोना से सामान्य हो रहे हालातों को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने 25 जून से पहले चरण के लाभार्थियों को स्कूल आवंटन पत्र का वितरण करना शुरू किया है। 70 फीसदी से अधिक आवंटन पत्र बंट चुके हैं। इसके बावजूद स्कूलों के बंद होने या दिलचस्पी न लेने से प्रवेश की प्रक्रिया धीमी रफ्तार से चल रही है। जिस वजह से तकरीबन 3000 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रवेश न होने से उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है। जिस वजह से बच्चों के साथ अभिभावक भी परेशान हैं। विद्यालयों पर जाने के बाद उन्हें बंद होने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है। जबकि शासन के निर्देश पर एक जुलाई से स्कूलों को खोलने का निर्देश दिया जा चुका है।