20 फरवरी को डॉ. मंजुला मुख्य शाखा में आई थीं। उन्होंने 20 और 25 लाख की दो एफडी तुड़वाने की बात कही। चेहरे पर थकान और डर देखकर बैंक कर्मियों को शक हुआ तो उन्होंने इतनी जल्दी एफडी की रकम न मिलने की बात कही। उन्होंने तमिलनाडु में बेटे के फ्लैट, जमीन खरीदने की बात कही और 21 फरवरी को दबाव बनाकर एफडी की रकम ले ली। रिटायर्ड अफसर होने के चलते उनसे ज्यादा पूछताछ नहीं की गई।
कैंट थाना क्षेत्र के नहर रोड निवासी रिटायर्ड आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट कर ऐसा दबाव और डर दिखाया कि उन्हें बैंक में अपनी एफडी तुड़वाने के लिए झूठ बोलना पड़ा। बैंक कर्मियों और अफसर को शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ भी की, लेकिन फिर जरूरत बताने पर उन्हें भुगतान करना पड़ा।
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एसबीआई मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक अमित शंकर ने बताया कि 20 फरवरी को डॉ. मंजुला मुख्य शाखा में आई थीं। उन्होंने 20 और 25 लाख की दो एफडी तुड़वाने की बात कही। चेहरे पर थकान और डर देखकर बैंक कर्मियों को शक हुआ तो उन्होंने इतनी जल्दी एफडी की रकम न मिलने की बात कही।
उन्होंने तमिलनाडु में बेटे के फ्लैट, जमीन खरीदने की बात कही और 21 फरवरी को दबाव बनाकर एफडी की रकम ले ली। रिटायर्ड अफसर होने के चलते उनसे ज्यादा पूछताछ नहीं की गई। उनके खाते में रकम ट्रांसफर होते ही उन्होंने दूसरे बैंक खाते में रुपये भेज दिए।
64 वर्षीय रिटायर्ड महिला अफसर डॉ. मंजुला 20 फरवरी को मुख्य शाखा में पहुंचीं तो उनके हाव-भाव को देखकर बैंककर्मियों को शक हुआ। उन्होंने इतनी जल्दी एफडी की रकम ट्रांसफर न होने की बात कही। इस पर डॉ. मंजुला नाराज हो गईं और मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक अमित शंकर के पास पहुंचीं।
उन्होंने बताया कि कभी बताया कि तमिलनाडु में रहने वाले बेटे को जमीन खरीदनी है। कभी बताया कि फ्लैट लेना है। रकम जल्द से जल्द खाते में ट्रांसफर की जाए।
अमित शंकर के अनुसार, रिटायर्ड महिला के चेहरे पर डर, खौफ झलक रहा था। हालांकि वह एक अफसर रह चुकी हैं, वह जाहिर नहीं होने दे रहीं थीं। हंसकर उन्होंने बेटे को फ्लैट खरीदने के लिए रकम देने की बात कही। अमित शंकर ने डिजिटल अरेस्ट पर भी चर्चा की लेकिन डॉ. मंजुला ने खारिज कर दिया। इसके बाद महिला को जल्द रकम ट्रांसफर करने का आश्वासन देकर घर भेज दिया।
एक दिन बैंक ने होल्ड की थी रकम, डॉक्टर के नाराज होने पर रकम की ट्रांसफर
डॉ. मंजुला के साथ किसी तरह के फ्रॉड के शक में मुख्य प्रबंधक अमित शंकर ने 20 फरवरी को एफडी की रकम होल्ड कर दी थी। 21 फरवरी को डॉ. मंजुला फिर पहुंचीं और नाराज होकर रकम ट्रांसफर करने की बात कही। उन्होंने तत्काल अपनी एफडी की रकम खाते में भेजने का दबाव बनाया। इसके बाद उसी दिन दोनों एफडी की 45 लाख की रकम उनके एसबीआई खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
बैंक से कुछ न छिपाएं, जागरूकता से ही फ्रॉड से बचाव
मुख्य प्रबंधक अमित शंकर ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट हो या फिर किसी तरह का बैंकिंग फ्रॉड हो, बैंक से कुछ न छिपाएं। समय रहते सहयोग करने से गाढ़ी कमाई की रकम खोने से बच सकती है। बताया कि किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक न करें। अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल बिल्कुल भी रिसीव न करें। कोई भी ईडी, कस्टम का अफसर बनकर फोन करे तो तत्काल कॉल कट कर दें। पुलिस के साथ बैंक को भी सूचना दें।
ये है मामला
कैंट इलाके के नहर रोड निवासी 64 वर्षीय डॉ. मंजुला श्रीवास्तव को डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने नौ दिन में करीब 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके लिए डॉक्टर ने अपने सभी बैंकों की एफडी तुड़वा दी। 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी करते रहे। मोबाइल 24 घंटे चार्जिंग पर लगा रहता था। जालसाजी की जानकारी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई। साइबर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।