गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन एवं वैश्विक कल्याण का सशक्त मार्ग है। योग भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य अंग है।
वह डीडीयू की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम योग बंधन के चौथे दिन के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रही थीं। चौथे दिन चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय, थाईलैंड के प्रतिभागियों ने योग व्याख्यान एवं अभ्यास सत्र में हिस्सा लिया। कुलपति ने कहा कि ''''योग बंधन'''' आज एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के लोग योग से जुड़ रहे हैं और इसके लाभों के प्रति जागरूकता निरंतर बढ़ रही है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करते हैं।
मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. विनायक दुबे ने ''''योग का विज्ञान'''' विषय पर विस्तार से बताया। चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय के प्रो. चंचाई बूनला समेत कई विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। समन्वयन प्रो. विजय चहल व प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया।