पुलिस ने इस प्रकरण के दो गवाहों से भी संपर्क साधा है और उनकी जल्द ही अगली तारीख पर गवाही हो सकती है। लेकिन, इसी बीच अब माफिया पर शिकंजा कसने का शासन से पत्र आने के बाद पुलिस ने उसकी गायब फाइलों को एक बार फिर से संबंधित जिलों को पत्र भेजकर याद दिलाई है।
18 अगस्त को कैंट पुलिस ने भिजवाया था जेल
गैंगस्टर एक्ट के केस में गैर जमानती वारंट जारी होने पर कैंट थाना पुलिस ने 18 अगस्त, 2022 को माफिया राजन तिवारी को रक्सौल के पास से गिरफ्तार किया था। वह नेपाल भागने की फिराक में था। जेल जाते समय राजन तिवारी पुलिसकर्मियों से भिड़ गया और जान से मारने की धमकी देने लगा। पुलिसकर्मियों ने कैंट थाने में उसके विरुद्ध केस दर्ज कराया। प्रशासनिक आधार पर दो दिन बाद राजन तिवारी को गोरखपुर से फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया, जहां से वह जमानत पर छूटा। अब पुलिस इसी केस में गवाही और पैरवी करके सजा दिलाने की कोशिश में है।
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पूर्वी चंपारण में रहता है माफिया राजन
90 के दशक के कुख्यात बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला के संगत में आकर अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनने वाला राजन तिवारी पूर्वांचल और बिहार में दहशत का पर्याय रहा है। गोरखपुर और आसपास के जिलों से लेकर बिहार तक उसके नाम की दहशत है। शिकंजा कसने पर वह बिहार चला गया। पिछले दो दशक से पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के गोविंदगंज में रहता है और यहीं से विधायक भी चुना गया था।
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एसपी साउथ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि माफिया राजन तिवारी के गोरखपुर में एक ही केस में कोर्ट में संज्ञान करा दिया गया है। उसके गवाह एक दिन आए भी थे, लेकिन कचहरी में शोक सभा होने की वजह से गवाही नहीं हो पाई थी। उनकी गवाही जल्द करा ली जाएगी। लखनऊ, पटना, वाराणसी और प्रयागराज को गायब फाइलों के बारे में पत्र लिखा गया है। उन्हें गोरखपुर में राजन के आपराधिक इतिहास के बारे में बता दिया गया है कि वह गोरखपुर के टॉप 10 में है, इस वजह से आगे की कार्रवाई संबंधित जिला जल्द शुरू कराएं।