जंगली बिल्ली के चार बच्चों को संतकबीरनगर से रेस्क्यू कर गोरखपुर चिड़ियाघर लाया गया है। बच्चों को पशु अस्पताल में रखकर उपचार किया जा रहा है। सेहतमंद होने पर उन्हें प्राणि उद्यान में ही रखा जाएगा। पशु चिकित्सक ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि बच्चों को दो दिनों से भोजन नहीं मिला है। इसलिए उनका स्वास्थ्य सामान्य नहीं है, लेकिन खतरे से बाहर हैं।
जानकारी के अनुसार, संतकबीरनगर के धर्मसिहंवा स्थित जनता इंटर कॉलेज में बुधवार सुबह जंगली बिल्ली के चार बच्चे मिले। लोगों को लगा कि ये तेंदुआ के बच्चे हैं। वन विभाग की टीम आई रेस्क्यू करने तो उन्होंने भी कहा कि प्रथम दृष्टया तेंदुआ के बच्चे ही लग रहे हैं।
उन्होंने बच्चों की फोटो खींचकर और वीडियो बनाकर विभाग के आला अधिकारियों और गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा। तेंदुआ के बच्चे होने की इसलिए भी आशंका जताई क्योंकि बच्चे सामान्य बिल्ली के जैसे नहीं हैं। इसके अलावा इसी स्कूल में इसी कमरे से बीते सोमवार को एक तेंदुआ भी निकला था। उसने तीन लोगों को घायल कर दिया था। लोगों को लगा कि बच्चे उसी तेंदुआ के हैं।
बहरहाल डीएफओ डॉ रंगाराजू पी ने वन विभाग की टीम के साथ सभी बच्चों को चिड़ियाघर भेजा। पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि टीम शाम चार बजे बच्चों को लेकर चिड़ियाघर आई। बच्चों की हालत थोड़ी चिंताजनक थी, लेकिन नियंत्रित थी। चारों बच्चे प्राणि उद्यान में ही रहेंगे।
उन्होंने कहा कि अक्सर लोग तेंदुआ और जंगली बिल्ली के बीच उलझ जाते हैं। सभी बच्चों की उम्र 8 से 10 दिन की है। अभी इन्हें दवाओं के साथ हल्का भोजन दिया जा रहा। बड़ा होने पर इनका भोजन छोटे वन्य जीव जैसे चूहा, खरगोश, पक्षी और मछलियां होती हैं। तालाब के पास ये बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।