गोरखपुर। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर विचारों के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ, सभी के प्रति अपनत्व का भाव रखने वाले, सादगी पसंद व्यक्तित्व के धनी, शीर्ष पुरुष थे। उन्हें स्मरण करने के कई कारण हैं। वे समाजवाद के मौलिक सुधारों से अधिक समाज के साझेपन के ताने-बाने को बचाने के लिए याद किए जाएंगे।
उक्त विचार समाजवादी चिंतक प्रो. चितरंजन मिश्र ने व्यक्त किए। वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती के अवसर पर रेलवे मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपने पांच दशक के राजनीतिक कार्यकाल में चंद्रशेखर अगर किसी कार्य या प्रयास के लिए सर्वाधिक जाने जाएंगे तो वह तोड़ने नहीं जोड़ने के लिए।
चंद्रशेखर के साथ लंबे समय तक मित्रवत जीवन जीने वाले सरदार देवेंद्र सिंह ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी कर वे बीएचयू के तत्कालीन कुलपति आचार्य नरेंद्र देव के संपर्क में आए। वह उनके अधीन शोध कार्य करना चाहते थे। आचार्य नरेंद्र देव ने उन्हें समझाया कि तुम्हें शोध कार्य से क्या मिलेगा? तुम्हें एक बेहतर समाज के लिए कार्य करना चाहिए। उनके सुझाव पर वे बलिया आए और सोशलिस्ट पार्टी ज्वाइन की।
कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. राजवंत राव, छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम सिंह, छात्र नेता ओम नारायण पांडेय, विनीत कुमार सिंह, आरपी भट्ट, देवेंद्र यादव, मनोज द्विवेदी, सतीश चंद्र अवस्थी, रामकृपाल शर्मा, सतीश सिंह, निशांत यादव, विक्रम आदि मौजूद रहे।