विदेश जाना कोई जरूरी नहीं है। यह एक मजबूरी है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश हमें दूसरे दर्जे के नागरिकों के रूप में मानते हैं। अगर राज्य या सरकार इस भेदभावपूर्ण फैसले को तुरंत वापस नहीं लेती है तो हमें आंदोलन तेज होगा।
रमेश गुरुंग ने कहा कि हमारे पेंशन के माध्यम से एक दिन में लगभग 20 करोड़ रुपये नेपाल में आ रहा है। सेवा के दौरान, हमारा वेतन भी देश में आता है। भले ही हमने विदेश में सेवा की हो, हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। हमारा रिश्ता दोनों देश के लोगों के साथ है।
गोरखा सैनिकों के लिए भारत और नेपाल दोनों देश वंदनीय है। इसलिए, हम नेपाल सरकार से इस सदियों पुराने रिश्ते को और मजबूत करने का अनुरोध करना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कड़वाहट नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर अर्जुन, रामचन्द्र, भीमसेन, शिव गुरुंग, शीतल गुरुंग मौजूद रहे।