ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए ठगी का मामला
- आंतरिक जांच में 112 से अधिक म्यूल खाते चिन्हित, 25 से ज्यादा खाते बंद मिले
- बैंक प्रबंधन ने कैशियर व तत्कालीन शाखा प्रबंधक को नोटिस भेजकर मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में बैंकिंग सिस्टम की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और बैंक स्तर पर की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए 112 से अधिक म्यूल खातों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से 25 से अधिक खाते पहले ही बंद पाए गए, जबकि शेष खातों में संदिग्ध लेन-देन के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। बैंक प्रबंधन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि खातों के संचालन, केवाईसी सत्यापन और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की निगरानी में कई स्तर पर लापरवाही बरती गई। पुलिस के अनुसार, मामले में जेल भेजे जा चुके गुलरिहा थाना क्षेत्र के नारायणपुर नंबर दो टोला हीरागंज निवासी राकेश प्रजापति ने बैंक के कैशियर कमलेश और तत्कालीन शाखा प्रबंधक से कथित साठगांठ कर नियमों के विपरीत तरीके से म्यूल खाते खुलवाए। इन खातों के जरिये ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकासी की जाती थी।
जांच में यह भी पाया गया कि कई खातों में असामान्य लेन-देन होने के बावजूद समय रहते न तो इसकी रिपोर्टिंग की गई और न ही अलर्ट सिस्टम के सक्रिय होने के बाद आवश्यक कार्रवाई हुई। इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए बैंक प्रबंधन ने संबंधित कैशियर कमलेश और तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुजीत दुबे को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि ऑनलाइन गेमिंग एप के माध्यम से लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी की जाती थी। पीड़ितों से एप के जरिये धनराशि जमा कराई जाती और बाद में रकम को म्यूल खातों के माध्यम से इधर-उधर कर निकाल लिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए साइबर सेल और बैंक की तकनीकी टीम संयुक्त रूप से डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण कर रही है। सीओ कैंट रवि सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में कई संदिग्ध खातों की पहचान हो चुकी है और आगे और खातों के सामने आने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट में जमानत का विरोध करेगी पुलिस
मामले में आरोपी जान ए आलम की जमानत को लेकर पुलिस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा जाएगा, ताकि आरोपी को जमानत न मिल सके।
कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों के बयान शामिल
थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि जालसाजों ने एक कॉल सेंटर में काम करने के लिए आठ युवतियों को रखा था। ये युवतियां लोगों को कॉल कर ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये सट्टा लगाने और खेल खेलने के लिए लुभावने ऑफर देती थीं। पुलिस ने सभी युवतियों के लिखित और वीडियोग्राफी के माध्यम से बयान दर्ज कर विवेचना में शामिल कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।