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Brain Stroke Day: ब्रेन हेमरेज में पहला एक घंटा ज्यादा महत्वपूर्ण, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे सलाह

Sat, 29 Oct 2022 10:52 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डॉ अनुराग सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। पहला सिस्मिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की नसों में रक्त प्रवाह कुछ कारणों से रुक जाता है। इसकी वजह से दिमाग की नसों में खून का थक्का जम जाता है। इससे ब्रेन हेमरेज होने की संभावना 99 प्रतिशत हो जाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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हृदय रोग और कैंसर के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें ब्रेन हेमरेज से होती हैं। विश्व में हर तीन मिनट में ब्रेन हेमरेज (ब्रेन स्ट्रोक) से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। सामान्य दिनों की तुलना में ठंड में सबसे अधिक ब्रेन स्ट्रोक के मामले होते हैं और मौत का आंकड़ा दोगुना हो जाता है। इन सबके बीच अगर मरीज को एक घंटे के अंदर इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है।

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न्यूरो फिजिशियन डॉ अनुराग सिंह ने बताया कि बदल रहे मौसम की वजह से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है। ठंड में लोगों के उच्च रक्तचाप, शुगर, मोटे लोगों और हृदय के मरीजों को ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में दिमाग की नस फटने के मामले सबसे अधिक आते हैं।

बताया कि अगर ब्रेन स्ट्रोक में समय से इलाज मिलने पर मरीज की जान बच सकती है। साथ ही उनका प्रभाव भी कम होता है। ब्रेन स्ट्रोक होने पर पहला घंटा ही बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर मरीज के देखने, सुनने और समझने की क्षमता प्रभावित हो रही है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है।
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बताया कि तापमान का असर सीधे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में जैसे-जैसे पारा गिरता है तो नसों में सिकुड़न शुरू हो जाती है। इसकी वजह से दिगाम की नसें में रक्त का प्रवाह धीरे हो जाता है। कई बार खून के प्रेशर से कई बार दिमाग की नसें फट जाती हैं। इसकी वजह से मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

 

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दो तरह के ब्रेन स्ट्रोक का खतरा ज्यादा

डॉ अनुराग सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। पहला सिस्मिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की नसों में रक्त प्रवाह कुछ कारणों से रुक जाता है। इसकी वजह से दिमाग की नसों में खून का थक्का जम जाता है। इससे ब्रेन हेमरेज होने की संभावना 99 प्रतिशत हो जाती है। जबकि, दूसरा हेमरेजिक स्ट्रोक होता है। इसमें दिमाग की नसें फटने से ब्लड का प्रवाह तेज हो जाता है। इसमें मरीज के शरीर के किसी भी हिस्से में लकवा मार सकता है। कई बार मरीजों की मौत तक हो जाती है।

ये हैं लक्षण
  • शरीर के एक हिस्से, चेहरे, हाथ, टांग में सुन्नपन, बोलने और समझने में मुश्किल, एक या दोनों आंखों से साफ न दिखना।
  • तेज सिर दर्द, उल्टी होना, जी मिचलाना, शरीर के किसी भी हिस्से में अकड़न के साथ उसमें दर्द का पता न चलना।
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